दही हांडी 2025 की ये है सही तिथि, जानिए बाल गोपाल की इस अनोखी लीला की कहानी
Dahi Handi : दही हांडी भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं पर आधारित एक प्रमुख उत्सव है, जिसे कई जगहों पर "गोपालकला" के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन युवकों की टोली, जिन्हें गोविंदा कहा जाता है।
- Written By: सीमा कुमारी
दही हांडी (सौ.सोशल मीडिया)
Dahi Handi 2025 : सावन पूर्णिमा के बाद भाद्रपद महीने की शुरुआत हो जाती है। हिन्दू धर्म में इस महीने का विशेष महत्व है। इस महीने में गणेश चतुर्थी, कृष्ण जन्माष्टमी और दही हांडी समेत कई पर्व मनाए जाते हैं। इन्हों में से एक ‘दही हांडी’ का उत्साह भी जो हर साल श्री कृष्ण जन्माष्टमी के जन्म के अगले दिन, यानी दूसरे दिन मनाया जाता है। इस साल ‘दही-हांडी’ 16 अगस्त 2025 को है।
आपको बता दें, दही-हांडी का पर्व मुख्य रूप से महाराष्ट्र, वृंदावन, मथुरा में बहुत ही धूमधाम एवं हर्षोल्लास से मनाया जाता हैं। इस दिन उत्साह का माहौल देखते ही बनता हैं। ऐसे में आइए जानते है दही हांडी क्यों मनाते हैं, क्या है इस पर्व का महत्व।
कब मनाई जाएगी दही हांडी 2025
आपको बता दें, पंचांग के अनुसार इस वर्ष भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि का प्रारंभ 16 अगस्त को रात 09:34 बजे होगा और इसका अन्त 17 अगस्त 07:24 बजे होगा। ऐसे में दही हाण्डी 16 अगस्त 2025, शनिवार को मनाया जाएगा। इस पर्व का आयोजन खास तौर पर भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि को होता है। द्वापर युग से लेकर आज तक यह पर्व बड़े धूमधाम से मनाया जाता है।
सम्बंधित ख़बरें
Today’s Libra Horoscope: तुला राशि वालों को मिलेगा अपनों का साथ, लव लाइफ को लेकर बरतें सावधानी
Shani Jayanti 2026: शनि जयंती पर हनुमान जी की पूजा कर आप भी पा सकते हैं सभी बाधाओं से मुक्ति
Mahasanyog Vat Savitri Vrat : आज वट सावित्री व्रत पर महासंयोग, नोट कर लें पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त
Vat Savitri Vrat Katha : आज वट सावित्री व्रत में अवश्य पढ़ें यह कथा, इसके बिना अधूरी मानी जाती है पूजा
आखिर क्यों मनाया जाता है ‘दही-हांडी’ उत्सव
भगवान श्री कृष्ण की बाल लीला की कथाओं में माखन चुराकर खाने की कथा भी बहुत प्रचलित है। भगवान श्री कृष्ण अपने बाल सखाओं के साथ आस-पड़ोस के घरों में जाकर दही और माखन चोरी करके खाते थे।
चोरी होने के डर से सभी गोपियों ने दही और माखन की हांडी को घरों की छत पर लटकाना शुरू कर दिया। लेकिन श्री कृष्ण और उनके सभी सखा मानव श्रृंखला बनाकर हांडी तक पहुंच जाते थे और चाव से माखन खाते थे। सबसे ऊपर श्री कृष्ण रहते। तब से श्री कृष्ण की इस लीला को ‘दही-हांडी’ उत्सव के रूप में मनाया जाने लगा।
कहां-कहां मनाया जाता है दही हांडी उत्सव
आपको बता दें, दही हांडी उत्सव खासतौर से महाराष्ट्र में बड़े पैमाने पर मनाया जाता है। यहां की गलियों में गोविंदाओं की टोली के बीच प्रतियोगिताएं होती हैं और ऊंची से ऊंची मटकी फोड़ने की कोशिश की जाती है।
इसके अलावा उत्तर प्रदेश के मथुरा, वृंदावन और गोकुल जैसे स्थानों पर भी इस उत्सव की खास धूम देखी जाती है।
यह भी पढ़ें–सावन में इस दिन पड़ रहा है ‘वरलक्ष्मी व्रत’,जानिए सही डेट, पूजा विधि और महत्व
पर्व के दौरान पारंपरिक भजनों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की भी विशेष धूम रहती है। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य श्रीकृष्ण की उस बाल लीलाओं को जीवंत करना है, जब वे अपने दोस्तों के साथ मिलकर मक्खन चुराते थे।
