मंगलवार को है भाद्रपद की संकष्टी चतुर्थी, जानिए श्री गणेश जी की विशेष पूजा का शुभ मुहूर्त

Chaturthi :हिंदू कैलेंडर का यह छठा महीना सनातन धर्म में विशेष महत्व रखता है। इस महीने में कई व्रत त्योहार मनाई जाते हैं। जिसमें हेरम्ब या बहुला संकष्टी चतुर्थी भी। इस बार यह चतुर्थी 12 अगस्त को हैं।
मंगलवार को है भाद्रपद की संकष्टी चतुर्थी, जानिए श्री गणेश जी की विशेष पूजा का शुभ मुहूर्त
भाद्रपद संकष्टी चतुर्थी 2025 (सौ.सोशल मीडिया)
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Bhadwa Ki Chauth Kab Hai 2025 :10 अगस्त से भाद्रपद महीने की शुरुआत हो चुकी है। धार्मिक एवं आध्यात्मिक रूप से हिंदू कैलेंडर का यह छठा महीना सनातन धर्म में विशेष महत्व रखता है। इस महीने में कई व्रत त्योहार मनाई जाते हैं। जिसमें हेरम्ब या बहुला संकष्टी चतुर्थी भी। इस बार यह चतुर्थी 12 अगस्त को मनाई जाएगी।

ज्योतिषयों के अनुसार, भाद्रपद माह में आने वाली संकष्टी चतुर्थी को 'हेरम्ब या बहुला संकष्टी' चतुर्थी के नाम से जाना जाता है। इस दिन विघ्नहर्ता गणपति बप्पा की आराधना की जाती है और उनके निमित्त व्रत भी किया जाता है। ऐसे में यहां हम आपको बताएंगे भादो महीने में मनाए जाने वाले संकष्टी चतुर्थी यानी चौथ की पूजा विधि और शुभ मुहूर्त।

कब मनाई जाएगी भाद्रपद संकष्टी चतुर्थी 2025

आपको बता दें, पंचांग के अनुसार, भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 12 अगस्त की सुबह 08:41 मिनट से शुरू होगी और 13 अगस्त की सुबह 06:36 मिनट तक रहेगी। चूंकि चतुर्थी तिथि का चंद्रमा 12 अगस्त, मंगलवार को उदित होगा, इसलिए इसी दिन भादो की संकष्टी चतुर्थी का व्रत किया जाएगा। इस दिन सुकर्मा और सर्वार्थ सिद्धि योग का निर्माण भी होगा।

भादो संकष्टी चतुर्थी 2025 का शुभ मुहूर्त

हेरम्ब या बहुला संकष्टी चतुर्थी पर चंद्रमा उदय होने से पहले भगवान गणेश की पूजा की जाती है और बाद में चंद्र देव की। इस दिन गणपति बप्पा की पूजा का शुभ मुहूर्त 12 अगस्त को रात 8 बजे से 8:45 तक रहेगा। वहीं, रात 8:59 पर चंद्रमा उदय होगा।

कैसे करें? संकष्टी चतुर्थी पर भगवान गणेश की पूजा

  • इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें।
  • घर के मंदिर की सफाई कर गंगाजल का छिड़काव करें और व्रत का संकल्प लें।
  • इसके बाद एक चौकी पर भगवान गणेश की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।
  • फिर गणेश जी को दूर्वा घास, अक्षत, फूल, धूप, दीप, मोदक या लड्डू चढ़ाएं।
  • इसके बाद भगवान गणेश के मंत्रों और नामों का जाप करें।
  • फिर गणेश जी के सामने घी का दीपक जलाएं और आरती करें।
  • अंत में रात को चंद्रोदय के समय चंद्रमा को अर्घ्य दें और अपना व्रत खोलें।

बहुला संकष्टी चतुर्थी का महत्व

संकष्टी के दिन गणपति की पूजा करने से घर से नकारात्मक प्रभाव दूर होते हैं और शांति बनी रहती है। ऐसा कहा जाता है कि गणेश जी घर में आ रही सारी विपदाओं को दूर करते हैं और व्यक्ति की मनोकामनाओं को पूरा करते हैं। चन्द्र दर्शन भी चतुर्थी के दिन बहुत शुभ माना जाता है। सूर्योदय से प्रारम्भ होने वाला यह व्रत चंद्र दर्शन के बाद संपन्न होता है। पूरे साल में संकष्टी चतुर्थी के 13 व्रत रखे जाते हैं। सभी व्रत के लिए एक अलग व्रत कथा है।

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