ज्येष्ठ दुर्गाष्टमी की पूजा का यह है शुभ मुहूर्त, विधिवत पूजा से मिलेगी मां दुर्गा की कृपा, जानिए व्रत पारण के नियम
मासिक दुर्गाष्टमी का व्रत पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ करने से मां दुर्गा प्रसन्न होती हैं और भक्तों की सभी परेशानियां दूर करती हैं, साथ ही मनोकामनाएं भी पूरी करती हैं।
- Written By: सीमा कुमारी
मासिक दुर्गाष्टमी (सौ.सोशल मीडिया)
मासिक दुर्गाष्टमी हर महीने शुक्ल पक्ष की अष्टमी को मनाई जाती हैं। इस बार जून महीने की मासिक दुर्गाष्टमी का व्रत आज 3 जून, मंगलवार को रखा जाएगा। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन भक्त बड़ी श्रद्धा से देवी दुर्गा की पूजा अर्चना करते हैं।
ऐसी मान्यता है कि इस दिन देवी दुर्गा की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और भक्तों के जीवन में आने वाली सभी परेशानियां दूर होती हैं। ऐसे में आइए जानते हैं ज्येष्ठ महीने, यानी की जून महीने में पड़ने वाली दुर्गाष्टमी की तिथि, मुहूर्त, पूजा विधि और व्रत पारण के नियम।
क्या है मासिक दुर्गाष्टमी की शुभ तिथि :
आपको बता दें, पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि 2 जून दिन सोमवार को रात 8 बजकर 34 मिनट से शुरू होगी और अगले दिन 3 जून दिन मंगलवार को रात 9 बजकर 56 मिनट पर समाप्त होगी।
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ऐसे में उदया तिथि के अनुसार, मासिक दुर्गा अष्टमी का व्रत मंगलवार, 3 जून को ही रखा जाएगा और पारण अगले दिन 4 जून दिन बुधवार को किया जाएगा।
जानिए पूजा का शुभ मुहूर्त :
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 03 बजकर 44 मिनट से 04 बजकर 26 मिनट तक
प्रातः सन्ध्या: सुबह 04 बजकर 05 मिनट से 05 बजकर 07 मिनट तक
अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11 बजकर 29 मिनट से दोपहर 12 बजकर 23 मिनट तक
विजय मुहूर्त: दोपहर 02 बजकर 12 मिनट से 03 बजकर 07 मिनट तक
गोधूलि मुहूर्त: शाम 06 बजकर 43 मिनट से 07 बजकर 04 मिनट तक
सायाह्न सन्ध्या: शाम 06 बजकर 45 मिनट से 07 बजकर 47 मिनट तक
निशिता मुहूर्त: रात 11 बजकर 35 मिनट से 12 बजकर 17 मिनट तक (03 जून तक)
अमृत काल: रात 08 बजकर 23 मिनट से 10 बजकर 05 मिनट तक
ऐसे करें दुर्गाष्टमी पूजा
शास्त्रों के अनुसार, मासिक दुर्गाष्टमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद घर के पूजा स्थान पर मां दुर्गा की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें और फिर व्रत का संकल्प लीजिए।
फिर मां दुर्गा को रोली या हल्दी से तिलक करें और मां को फूल माला,फल, और श्रृंगार की 5 चीजें चढ़ाएं।
इसके बाद धूप-दीपक जलाकर दुर्गा चालीसा का पाठ करें और आरती के साथ पूजा का समापन करें। फिर रात को चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत का पारण करें।
मासिक दुर्गाष्टमी व्रत पारण के नियम
मासिक दुर्गाष्टमी के व्रत का पारण अगले दिन, नवमी तिथि को सूर्योदय के बाद किया जाता है। पारण के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। मां दुर्गा की दोबारा पूजा करें और व्रत सफलतापूर्वक संपन्न होने के लिए उनका धन्यवाद करें।
अष्टमी व्रत का पारण अष्टमी तिथि समाप्त होने के बाद नवमी तिथि में किया जाता है। यदि आप आज व्रत कर रहे हैं, तो पारण का समय 4 जून 2025, बुधवार को सूर्योदय के बाद होगा।
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पारण में सबसे पहले सात्विक भोजन ग्रहण करें। इसमें प्याज, लहसुन और तामसिक चीजों का प्रयोग नहीं होना चाहिए। आप फल, दूध, दही, साबूदाना खिचड़ी या अपनी पसंद का कोई भी सात्विक भोजन कर सकते हैं।
इस दिन चावल का सेवन भी कर सकते हैं। पारण करने से पहले, ब्राह्मणों या जरूरतमंदों को अपनी सामर्थ्य अनुसार भोजन, फल या दक्षिणा का दान अवश्य करें। मासिक दुर्गाष्टमी का व्रत पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ करने से मां दुर्गा प्रसन्न होती हैं और भक्तों की सभी परेशानियां दूर करती हैं, साथ ही मनोकामनाएं भी पूरी करती हैं।
