वट सावित्री पूर्णिमा व्रत(सौ.सोशल मीडिया)
वट सावित्री पूर्णिमा का व्रत हर साल ज्येष्ठ महीने में आने वाली पूर्णिमा को रखा जाता है। इस बार वट पूर्णिमा का व्रत 10 जून को रखा जाएगा। साल में वट सावित्री का व्रत दो बार रखा जाता है।
आपको बता दें, जहां उत्तर भारत में ज्येष्ठ अमावस्या के दिन वट सावित्री व्रत रखा जाता है तो वहीं ज्येष्ठ पूर्णिमा पर वट सावित्री व्रत महाराष्ट्र, गुजरात आदि में रखा जाता है। ये दिन सुहागिन स्त्रियों के लिए बहुत खास होता है।
वैसे तो पूर्णिमा लक्ष्मी जी को समर्पित है, लेकिन वट पूर्णिमा व्रत महिलाएं अपने पति के मंगल कामना के लिए रखती है। इस साल 2025 में वट पूर्णिमा कब है और अखंड सुहाग पाने के लिए स्त्रियां इस दिन क्या करती हैं? आइए जानते हैं इस बारे में।
आपको बता दें, पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह की पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 10 जून को सुबह 11 बजकर 35 मिनट पर होगी। वहीं तिथि का समापन 11 जून को दोपहर 1 बजकर 13 मिनट पर होगा। ऐसे में ज्येष्ठ माह की पूर्णिमा तिथि का व्रत 10 जून को करना उचित माना जा रहा है।
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व्रट सावित्री पूर्णिमा व्रत में विभिन्न प्रकार के फल और मिठाई अर्पित किए जाते हैं। इसके अलावा कुछ जगहों पर इस दिन पूड़ी, हलवा और चने की दाल भी भोग के रूप में चढ़ाए जाते हैं। कहा जाता है इन भोग को अर्पित करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही जीवन में बरकत बनी रहती है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन सावित्री ने अपने पति सत्यवान को यमराज के प्रकोप से जीवित कराया था। सत्यवान का शव वट वृक्ष के नीचे रखा गया और सावित्री ने वट वृक्ष की पूजा की, इसलिए वट पूर्णिमा व्रत के दिन स्त्रियां अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए बरगद के पेड़ की पूजा करती हैं। 7 जन्मों के पवित्र वैवाहिक बंधन के लिए 7 बार परिक्रमा कर पेड़ पर कच्चा सूत लपेटती हैं। सुहाग की सामग्री का सुहागिनों को दान करती हैं।