साल 2025 का अंतिम प्रदोष बुधवार को, नोट कीजिए पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त, महादेव बरसाएंगे विशेष कृपा
Paush Pradosh Vrat: मान्यता है कि, इस दिन श्रद्धापूर्वक महादेव की आराधना करने से साधक की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सौभाग्य, शांति तथा समृद्धि का वास होता है।
- Written By: सीमा कुमारी
साल 2025 का अंतिम प्रदोष (सौ.सोशल मीडिया)
December Second Pradosh Vrat 2025: प्रदोष, भगवान शिव को समर्पित एक अत्यंत पवित्र व्रत है, जिसे हर माह की त्रयोदशी तिथि पर रखा जाता है। इस बार साल 2025 का आखिरी महीने यानी दिसंबर का पहला प्रदोष व्रत 2 दिसंबर को रखा जा चुका है। अब इस महीने में दूसरा प्रदोष व्रत 17 दिसंबर 2025 को रखा जाएगा।
मान्यता है कि, इस दिन श्रद्धापूर्वक महादेव की आराधना करने से साधक की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सौभाग्य, शांति तथा समृद्धि का वास होता है। इसके अलावा प्रदोष पर शिवलिंग पर जल, दूध, गंगाजल, बेलपत्र सहित पुष्प अर्पित करने से व्यक्ति के समस्त पाप नष्ट होते हैं। साथ ही महादेव अत्यंत प्रसन्न होकर अपनी कृपा बरसाते हैं। आइए जानते हैं कि पौष माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि कब पड़ेगी।
17 दिसंबर प्रदोष व्रत पर पूजन का मुहूर्त
17 दिंसबर को शाम 6 बजकर 4 मिनट से रात 8 बजकर 41 मिनट तक प्रदोष व्रत का पूजन करना शुभ रहेगा। इसके साथ ही इस दिन भगवान शिव और पार्वती के साथ ही भगवान गणेश का भी पूजन करें। इससे बुध ग्रह का शुभ प्रभाव आपको देखने को मिलेगा।
सम्बंधित ख़बरें
Shiva Temple: देशभर के शिवालयों में उमड़ा आस्था का सैलाब, काशी से देवघर तक, लाखों श्रद्धालुओं ने किया जलाभिषेक
Sawan Somwar 2026: पहले सावन सोमवार से पहले जरूर कर लें ये 5 तैयारियां, पूरे महीने बनी रहेगी भगवान शिव की कृपा
Kamika Ekadashi 2026: कामिका एकादशी पर ऐसे करें पूजा, खुलेगा सौभाग्य का द्वार, जानें तिथि और शुभ मुहूर्त
सावन सोमवार के व्रत में पीरियड्स आ जाएं तो क्या करें? जानिए शिव पूजा और उपवास के शास्त्रीय नियम
प्रदोष व्रत बनेंगे ये शुभ योग
17 दिसंबर को प्रदोष काल में सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग देखने को मिलेगा। इस दिन शाम 5 बजकर 11 मिनट से 18 दिसंबर की सुबह 7 बजकर 8 मिनट तक सर्वार्थ सिद्धि योग रहेगा। वहीं, इसी समय अमृत सिद्धि योग भी रहेगा। इस कारण दिसंबर 2025 का दूसरा प्रदोष व्रत बेहद ही शुभ रहेगा।
प्रदोष व्रत के प्रमुख लाभ:
पाप और दोष मुक्ति:
माना जाता है कि इस व्रत से सभी पिछले पाप धुल जाते हैं और शिव लोक की प्राप्ति होती है।
मनोकामना पूर्ति:
श्रद्धापूर्वक व्रत रखने से सभी इच्छाएं पूरी होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
स्वास्थ्य और निरोगता:
विशेषकर मंगलवार के प्रदोष व्रत से रोगों से मुक्ति मिलती है और व्यक्ति स्वस्थ रहता है।
संतान और वैवाहिक सुख:
सोम प्रदोष व्रत संतान प्राप्ति और वैवाहिक जीवन को खुशहाल बनाने में सहायक होता है।
आध्यात्मिक विकास:
यह व्रत मानसिक शांति, आध्यात्मिक ज्ञान और आंतरिक एकाग्रता बढ़ाता है।
साल 2026 किन राशि के जातकों के लिए लाएगा भाग्योदय, देखिए अपना राशिफल
ग्रह दोष निवारण:
ज्योतिष के अनुसार, यह व्रत कुंडली के अशुभ ग्रहों के बुरे प्रभाव को कम करता है।
