सावन की कालाष्टमी पर बन रहा है अतिशुभ शिववास योग, इस मुहूर्त में करें पूजा
हिंदू धर्म में कालाष्टमी व्रत का विशेष महत्व है। इस दिन काल भैरव जी की पूजा करने से मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती है। तो यहां जानिए कि सावन माह में कालाष्टमी व्रत कब है और पूजा मुहूर्त क्या रहेगा।
- Written By: सीमा कुमारी
कब है सावन महीने में कालाष्टमी (सौ.सोशल मीडिया)
Kalashtami 2025 : भगवान शिव का प्रिय महीना सावन की शुरुआत हो गई है। सावन में पड़ने वाली कालाष्टमी व्रत का भी अपना अलग ही महत्व होता है। क्योंकि यह भी व्रत भगवान भोलेनाथ के उग्र रूप यानी काल भैरव को समर्पित है। हिंदू शास्त्रों के अनुसार,हर महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी मनाई जाती है। इस साल 2025 सावन महीने की कालाष्टमी का व्रत 17 जुलाई, गुरुवार को मनाई जाएगी।
इस शुभ अवसर पर काल भैरव देव की भक्ति भाव से पूजा की जाती है। साथ ही विशेष कामों में सफलता पाने के लिए व्रत रखा जाता है। इस व्रत को करने से साधक को सभी संकटों से मुक्ति मिलती है।
साथ ही करियर और कारोबार में मनमुताबिक सफलता मिलती है। साधक श्रद्धा भाव से कालाष्टमी के दिन काल भैरव देव की पूजा करते हैं। ऐसे में आइए जानें कब है सावन में कालाष्टमी शुभ मुहूर्त एवं पूजा समय।
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कब है 2025 सावन महीने में कालाष्टमी
आपको बता दें, पंचांग के अनुसार,पंचांग के अनुसार, सावन माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 17 जुलाई को शाम 7 बजकर 8 मिनट पर शुरू होगी। वहीं, 18 जुलाई को शाम 5 बजकर 1 मिनट पर अष्टमी तिथि समाप्त होगी।
काल भैरव देव की निशा काल में पूजा की जाती है। इसके लिए 17 जुलाई को सावन माह की कालाष्टमी मनाई जाएगी। वहीं, निशा काल में पूजा का समय देर रात 12 बजकर 07 मिनट से लेकर 12 बजकर 48 मिनट तक है।
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सावन महीने की कालाष्टमी पर बन रहे है कई शुभ योग
ज्योतिषियों की मानें तो, सावन माह की कालाष्टमी पर सुकर्मा और शिववास का संयोग बन रहा है। शिववास योग शाम 7 बजकर 8 मिनट से बन रहा है। इस दौरान देवों के देव महादेव कैलाश पर जगत की देवी मां पार्वती के साथ रहेंगे। शिववास योग में काल भैरव देव की पूजा करने से साधक को दोगुना फल मिलेगा। साथ ही सभी बिगड़े काम बन जाएंगे।
पंचांग
सूर्योदय – सुबह 5 बजकर 34 मिनट पर
सूर्यास्त – शाम 7 बजकर 20 मिनट पर
ब्रह्म मुहूर्त – सुबह 4 बजकर 12 मिनट से 4 बजकर 53 मिनट तक
विजय मुहूर्त – दोपहर 2 बजकर 45 मिनट से 3 बजकर 40 मिनट तक
गोधूलि मुहूर्त – शाम 7 बजकर 19 मिनट से 7 बजकर 39 मिनट तक
निशिता मुहूर्त – रात्रि 12 बजकर 7 मिनट से 12 बजकर 48 मिनट तक
कालाष्टमी पर ऐसे करें काल भैरव देव की पूजा
- कालाष्टनमी व्रत के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें।
- स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें।
- व्रत के दिन पूजा स्थल को साफ करके गंगाजल छिड़कें।
- एक चौकी पर लाल रंग का कपड़ा बिछाकर उस पर काल भैरव और शिव जी की मूर्ति स्थापित करें।
- शिव जी की पूजा करें और काल भैरव को सफेद चंदन का तिलक लगाएं।
- फल, मिठाई और अन्य भोग अर्पित करें।
- आरती करें और व्रत का संकल्प लें।
- सूर्य देव को जल चढ़ाकर पूजा का समापन करें।
- कालाष्टमी के दिन काले कुत्ते को भोजन कराना शुभ माना जाता है।
