ज्येष्ठ पूर्णिमा का महा शुभ योग, क्यों है इस दिन स्नान-दान का बड़ा महत्व, जानिए पूजा का शुभ मुहूर्त और पूजाविधि
अभी ज्येष्ठ माह चल रहा है और इस महीने में आने वाली पूर्णिमा को ज्येष्ठ पूर्णिमा कहा जाता है। जो इस बार ज्येष्ठ माह की पूर्णिमा का व्रत 10 जून 2025, मंगलवार को रखा जाएगा।
- Written By: सीमा कुमारी
ज्येष्ठ पूर्णिमा 2025 (सौ.सोशल मीडिया)
हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि को चंद्र देव की पूजा के लिए सबसे शुभ माना जाता है, क्योंकि इस दिन चंद्रमा अपनी पूरी चमक के साथ दिखाई देता है। इस तिथि को प्रकाश और ऊर्जा का प्रतीक भी माना गया है।
आपको बता दें, अभी ज्येष्ठ माह चल रहा है और इस महीने में आने वाली पूर्णिमा को ज्येष्ठ पूर्णिमा कहा जाता है। जो इस बार ज्येष्ठ माह की पूर्णिमा का व्रत 10 जून 2025, मंगलवार को रखा जाएगा।
हिंदू धर्मशास्त्र के अनुसार, इस दिन सत्यनारायण भगवान के साथ माता लक्ष्मी की पूजा का महत्व होता है। साथ ही चंद्रमा का पूजन करना शुभ माना गया है। ऐसे में आइए जानते हैं इस साल कब है ज्येष्ठ पूर्णिमा कब है और स्नान-दान और पूजा का सही समय।
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कब है ज्येष्ठ पूर्णिमा 2025
आपको बता दें, पंचांग के अनुसार वर्ष 2025 में ज्येष्ठ पूर्णिमा का व्रत 10 जून मंगलवार के दिन रखा जाएगा। ज्येष्ठ मास हिंदू कैलेंडर के अनुसार तीसरा महीना होता है। इसके अलावा इस दिन इस दिन 3 शुभ योग का निर्माण होने जा रहा है।
ज्येष्ठ पूर्णिमा में बन रहे है कई शुभ योग
ज्येष्ठ पूर्णिमा व्रत के दिन सिद्ध योग, रवि योग और साध्य योग का निर्माण होगा। सिद्ध योग सुबह से लेकर दोपहर 1 बजकर 45 मिनट तक रहेगा। उसके उपरांत साध्य योग पूरा दिन रहेगा। अनुराधा नक्षत्र सुबह से लेकर शाम 06:02 तक है, उसके बाद से ज्येष्ठा नक्षत्र है।
इस दिन स्नान करने और दान करने से पापों का नाश होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन किए गए व्रत, पूजा और दान का फल कई गुणा बढ़ जाता है।
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यह दिन आत्मा की शुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का भी प्रतीक माना जाता है। ज्येष्ठ पूर्णिमा का स्नान और दान 11 जून बुधवार को होगा।
ऐसे करें पूर्णिमा पूजा
- पूर्णिमा पर सुबह ही स्नान कर लें।
- फिर पूजा के लिए सभी सामग्री को एक स्थान पर रख लें।
- सबसे पहले एक चौकी लेकर उसपर भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर को स्थापित करें।
- अब प्रभु का गंगाजल से अभिषेक करें और उन्हें फूल अर्पित करें।
- इसके बाद पीली मिठाई का भोग लगाएं। घी का दीपक जला लें।
- विष्णु जी के मंत्रों का जप करें।
- प्रभु की आरती करें
- इस दौरान भगवान विष्णु को तुलसी दल डालकर खीर का भोग लगा दें।
- रात को चंद्रमा की आराधना करें और एक लोटे में कच्चा दूध डालकर चंद्रमा को अर्घ्य दें।
क्या है ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन स्नान और दान का महत्व
ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन स्नान और दान का समय विशेष महत्व रखता है। इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करना शुभ माना जाता है। खासकर किसी पवित्र नदी या जलाशय में स्नान करने से आध्यात्मिक शुद्धि मिलती है। यदि किसी नदी के पास नहीं जा सकते तो घर पर भी शुद्ध जल से स्नान किया जा सकता है।
दान का भी विशेष महत्व है। इस दिन गरीबों, जरूरतमंदों, ब्राह्मणों और पंडितों को अन्न, वस्त्र, धन और अन्य आवश्यक वस्तुएं दान करना अत्यंत पुण्यकारी होता है। दान करने से मानसिक शांति प्राप्त होती है।
