नवरात्र की अष्टमी को माता महागौरी की पूजा, जानिए कितने बजे शुरू हो रही है अष्टमी तिथि
Durga Ashtami Kab Hai: ऐसी मान्यता है कि मां दुर्गा के आठवें स्वरूप की पूजा अर्चना करने से भक्तों के जीवन से सारे दुख-दर्द दूर हो जाते हैं और जीवन में सकारात्मकता व खुशहाली का आगमन होता है।
- Written By: सीमा कुमारी
कब है अष्टमी 2025 (सौ.सोशल मीडिया)
Maha Ashtami 2025: आज यानी 29 सितम्बर 2025 को शारदीय नवरात्रि का आठवां दिन मां दुर्गा के महागौरी स्वरूप को समर्पित है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन मां महागौरी की पूजा-अर्चना विशेष रूप से की जाती है। मां महागौरी शांति और सौम्यता की प्रतीक मानी जाती है।
ऐसी मान्यता है कि मां दुर्गा के आठवें स्वरूप की पूजा अर्चना करने से भक्तों के जीवन से सारे दुख-दर्द दूर हो जाते हैं और जीवन में सकारात्मकता व खुशहाली का आगमन होता है। श्वेत वस्त्र धारण करने वाली मां महागौरी का वाहन वृषभ है।
मां की चार भुजाएं हैं। ऊपर वाला दाहिना हाथ अभय मुद्रा में है, बाएं हाथ में डमरू है। माता अपने निचले हाथ में त्रिशूल धारण किए हुए हैं तथा वर मुद्रा में हैं। आइए जानते हैं इस वर्ष अष्टमी कब है और इस दिन माता की पूजा कैसे करें।
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कब है अष्टमी 2025
आपको बता दें, पंचांग के अनुसार, इस बार अष्टमी तिथि 29 सितंबर 2025, सोमवार को दोपहर 4 बजकर 31 मिनट से शुरू होगी और इसका समापन 30 सितंबर, मंगलवार को शाम 6 बजकर 6 मिनट पर होगा। इस प्रकार इस वर्ष महाअष्टमी 30 सितंबर 2025 को मनाई जाएगी।
अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11 बजकर 47 मिनट से दोपहर 12 बजकर 35 मिनट तक रहेगा।
ऐसे करें देवी महागौरी की पूजा
- अष्टमी के दिन प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- इसके बाद पूजा स्थल की सफाई करें और गंगाजल का छिड़काव करें।
- मां महागौरी का गंगाजल से अभिषेक कर उन्हें पूजा स्थल पर स्थापित करें।
- माता को लाल चंदन, अक्षत, लाल फूल और लाल चुनरी अर्पित करें।
- इसके बाद भोग स्वरूप फल, खील और मिठाइयां चढ़ाएं।
- दीपक और धूपबत्ती जलाकर दुर्गा सप्तशती और दुर्गा चालीसा का पाठ करें।
- फिर हवन करें और पान के पत्ते पर कपूर रखकर आरती करें।
- अंत में यदि पूजा में कोई कमी रह गई हो तो माता से क्षमा याचना करें।
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ये है महागौरी का प्रिय भोग और पुष्प
ज्योतिषियों के अनुसार, मां दुर्गा के आठवें स्वरूप महागौरी को मोगरा का फूल बहुत प्रिय है। इस दिन देवी मां के चरणों में यह फूल अर्पित करना चाहिए। इसके साथ ही मां को बर्फी और नारियल के लड्डू का भोग लगाएं। मां का सबसे प्रिय भोग नारियल माना गया है।
