पति-पत्नी को कब अलग होना चाहिए? जानिए प्रेमानंद महाराज ने क्या कहा
Marriage Guidance Spiritual:“प्रेमानंद महाराज ने बताया कि पति-पत्नी को कब रिश्ते को बचाना चाहिए और कब अलग होने का निर्णय सही माना जाता है। जानें किन स्थितियों में त्याग जरूरी हो जाता है।”
- Written By: सीमा कुमारी
पति-पत्नी के रिश्तों पर प्रेमानंद महाराज की राय (सौ.सोशल मीडिया)
Premanand Maharaj Relationship Advice:हिन्दू परंपरा में विवाह एक ऐसा बंधन है जिसे समाज और संस्कृति दोनों ही अत्यंत पवित्र मानते हैं। पति‑पत्नी का रिश्ता प्यार, सम्मान, समझ और सहानुभूति पर आधारित होता है। इसके बावजूद आजकल तनाव, असंतुलन और समझ की कमी के कारण घरेलू रिश्ते कभी‑कभी टूटने की कगार पर पहुंच जाते हैं। ऐसे समय में यह सवाल उठता है कि क्या कभी पति‑पत्नी को एक‑दूसरे का त्याग कर देना चाहिए? आइए जानते है वृंदावन के आध्यात्मिक गुरु प्रेमानंद महाराज से इस विषय के बारे में-
ऐसे जीवनसाथी का कर दें त्याग
प्रेमानंद जी महाराज कहते हैं कि यदि आपका पति व्यभिचारी है, दूसरों महिलाओं के साथ उसका संबंध है, ऐसी ही यदि आपकी पत्नी व्यभिचारी है और उसके दूसरे पुरुषों से संबंध है तो आपको उसका त्याग कर देना चाहिए। उससे अपने संबंध को तोड़ लेना चाहिए।
ऐसी पत्नी से न तोड़ें संंबंध
प्रेमानंद जी आगे कहते हैं कि यदि पत्नी आपके अधीन है यानि पत्नी आप से प्रेम करती है, वह आपके वैवाहिक बंधन का सम्मान करती है तो वह आपको गाली भी देती है तो उसको त्यागने की नहीं सोचना चाहिए।
सम्बंधित ख़बरें
Mother’s Day पर मां को दें गुड हेल्थ के ये अनोखे तोहफ़े, जो मां ने सोचा न होगा!
सावधान! जिम से लौटने के बाद दिखें ये लक्षण तो न करें नजरअंदाज, हो सकते हैं बड़ी बीमारी के शिकार
2026 में इस दिन मनाया जाएगा Mother’s Day, जानिए कब से और किसने की थी शुरुआत, क्या है इसका महत्व
Edible Flowers: गुलाब के अलावा इन फूलों को खाया भी जा सकता है, इनके फायदे जान आप भी शुरू कर देंगे खाना
यहां पत्नी के गाली देने का अर्थ यह है कि पत्नी आपकी गलत आदतों, दोष, अवगुण या बुराई के बारे में भला बुरा कहती है तो आपको उसे संबंध नहीं तोड़ना चाहिए।
प्रेमानंद महाराज जी का सबसे बड़ा संदेश यह है कि पति-पत्नी को एक-दूसरे के दोषों को न देखकर, प्रेम, सहयोग, और क्षमा के साथ जीवन जीना चाहिए।
जानें 11 दिसंबर को क्यों नहीं मनाते अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस, कैसे बदल गई 21 जून में यह तारीख
क्या दिन भर पूजा नहीं करनी
वो आगे कहते हैं, ‘हमारी दंपतियों से प्रार्थना है कि अपनी भक्ति को गुप्त रखें। ईश्वर भक्ति में इतने अंधे ना हो जाएं कि एक दूसरे को चिड़ होने लगे। संबंध नहीं टूटने चाहिए, भक्ति तोड़ती नहीं बल्कि भक्ति जोड़ती है, सुख देती है। वैर विग्रह नहीं कराती है। डिवोर्स होने से बचाती है, भक्ति पर कलंक लग जाएगा।
ऐसा बिल्कुल नहीं चाहिए हठ पूर्वक ठाकुरजी को विराजमन करके दिन भर पूजा में लगे हैं और पति को दिक्कत हो रही है तो मन ही मन से राधा-राधा जप लें।
