कौन दे सकता है कुर्बानी, बकरीद पर जानिए इस्लामिक धर्म से जुड़े नियम और महत्व
इस्लामिक परंपरा के अनुसार, बकरीद वाले दिन कुर्बानी देने से पहले कुछ नियमों का पालन करना बेहद जरूरी माना गया है। ऐसे में आइए फर्ज-ए-कुर्बानी के पहले पालन किए जाने वाले इन नियमों के बारे में विस्तार से जानते है-
- Written By: सीमा कुमारी
क्या है बकरीद पर कुर्बानी के नियम(सौ.सोशल मीडिया)
आज देशभर में बकरीद का त्योहार बहुत ही धूमधाम एवं हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। इस्लामिक धर्म गुरु के अनुसार, बकरीद को ईद-उल-अजहा या कुर्बानी की ईद के नाम से भी जाना जाता है। इस्लामिक धर्म गुरु के मुताबिक, ईद-उल-अजहा मुसलमानों की दूसरी सबसे बड़ी ईद है।
इसे बकरीद और कुर्बानी के नाम से भी जाना है। इस्लामिक परंपरा के अनुसार, बकरीद वाले दिन कुर्बानी देने से पहले कुछ नियमों का पालन करना बेहद जरूरी माना गया है। ऐसे में आइए फर्ज-ए-कुर्बानी के पहले पालन किए जाने वाले इन नियमों के बारे में विस्तार से जानते है-
क्या है बकरीद पर कुर्बानी के नियम
- इस्लामिक धर्मगुरु के अनुसार, सबसे पहले पहले तो जिस जानवर की कुर्बानी दी जानी हो, वह बालिग होना चाहिए।
- कहते हैं, जिस व्यक्ति के पास पहले से ही कर्ज है, वह व्यक्ति कुर्बानी नहीं दे सकता। कुर्बानी देने वाले के पास किसी भी तरह कोई कर्ज नहीं होना चाहिए।
- बकरीद वाले दिन जिस बकरे की कुर्बानी दी जाती है उसे पहले पेट भरकर खिलाया-पिलाया जाता है। इसके बाद ही उसकी कुर्बानी दी जाती है।
- इस्लामिक पररंपरा के अनुसार, जु-अल-हज्जा का चांद नजर आ जाने के बाद जिस व्यक्ति को कुर्बानी देनी हो, उसे अपने शरीर के किसी भी हिस्से का बाल और नाखून नहीं कटवाना चाहिए।
- ऐसे में भारत में चांद दिखने के बाद अब कुर्बानी देने वालों को पूरे 10 दिनों तक इस नियम को मानना चाहिए। जिन्हें कुर्बानी नहीं देनी है, वे लोग भी सवाब पाने के लिए इस नियम का पूरी तरह से पालन कर सकते हैं।
- वहीं, कुर्बानी के बाद उसके तीन भाग किए जाते हैं, जो घरवालों,रिश्तेदारों और गरीबों में बांटा जाता है।
- बकरीद के दिन कुर्बानी के से पहले फितरा निकलाने का नियम है, जिसके तहत आप तकरीबन एक किलो गेहूं या फिर इसके बराबर धनराशि किसी गरीब को दिया जाता है।
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इस्लाम में बकरीद का क्या है महत्व
बकरीद केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि यह आत्म-त्याग, सच्चे इरादों और इंसानियत की शिक्षा देने वाला पर्व है। यह त्योहार हमें याद दिलाता है कि अल्लाह पर विश्वास बनाए रखते हुए दूसरों की मदद करना और अपने स्वार्थ को त्यागना ही असली धर्म है।
