गीता पाठ के दौरान रखें इन बातों का ध्यान (सौ.सोशल मीडिया)
Geeta Jayanti Kis Mah Mein Manae Jaati Hai 2025: गीता जयंती हिंदू धर्म के सबसे पवित्र और महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है, जो मार्गशीर्ष मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी यानी मोक्षदा एकादशी के दिन मनाई जाती है। यह वह पावन पर्व है जब कुरुक्षेत्र के युद्ध के मैदान में, भगवान श्री कृष्ण ने अपने प्रिय सखा और शिष्य अर्जुन को श्रीमद्भगवद्गीता का अमर उपदेश दिया था।
यह ग्रंथ केवल एक धार्मिक पुस्तक नहीं है, बल्कि यह मानव जीवन के कर्तव्य, कर्म, ज्ञान, और भक्ति योग का सार है। जैसा कि आप सभी जानते है कि भगवत गीता, हिंदू धर्म का एक पवित्र ग्रंथ है, जिसके पाठ से जीवन में सकात्मक बदलाव आ सकते हैं।
गीता पाठ करते समय अगर आप कुछ नियमों का ध्यान रखते हैं, तो इससे आपको पाठ का पूर्ण लाभ प्राप्त हो सकता है। चलिए जानते हैं इस बारे में।
हिन्दू शास्त्रों के अनुसार, श्रीमद्भागवत गीता का पाठ करते समय साफ़ सफाई का पूरा ध्यान रखना चाहिए। सबसे पहले सुबह उठकर स्नान करें और इसके बाद साफ-सुथरे कपड़े पहनें। इसके बाद एक एक स्थान पर आसन बिछाकर बैठ जाएं और भगवान का ध्यान करते हुए श्रीमद्भागवत गीता का पाठ शुरू करें।
कहा जाता है कि, गीता पाठ के दौरान इस बात का ध्यान रखें कि वह जगह शांतिपूर्ण और स्वच्छ होनी चाहिए। इससे आप एकाग्रता के साथ पाठ कर पाएंगे। साथ ही इस बात का भी ध्यान रखें कि आपका ध्यान इधर-उधर न भटके और न ही किसी से बातचीत करें। आपने जो अध्याय शुरू किया है, उसे पूरा करने के बाद ही उठें।
गीता को कभी भी सीधे जमीन पर नहीं रखना चाहिए और न ही इसे हाथ में रखकर पाठ नहीं करना चाहिए। इसे हमेशा लकड़ी के आसन या चौकी पर रखें। साथ ही इस बात का भी ध्यान रखें कि गीता को कभी भी गंदे हाथों से छूना चाहिए।
गीता पाठ के दौरान आपके मन में किसी तरह का नकारात्मक विचार न लाएं। इन कार्यों से आपको गीता पाठ का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता।
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गीता के उपदेशों के केवल पाठ से लाभ नहीं मिलता, बल्कि इन्हें समझना और अपने जीवन में अपनाना भी जरूरी है। क्योंकि श्रीमद्भागवत गीता में भी कर्म को सर्वश्रेष्ठ माना गया है। ऐसे में व्यक्ति को गीता पाठ का पूरा लाभ तब मिलता है, जब इसे पूर्ण श्रद्धा और एकाग्रता से पढ़ा जाए, न कि केवल बौद्धिक ज्ञान को बढ़ाने के लिए।