मोक्षदा एकादशी की कथा मात्र से पितरों को मिलेगा मोक्ष, यहां पढ़ें महत्व और एकादशी की सही तिथि

Mokshada Ekadashi Parana: सभी एकादशियों में से मोक्षदा एकादशी अत्यंत पुण्यदायी है। शास्त्रों के अनुसार इस एकादशी का व्रत रखने से सभी पाप नष्ट होते हैं और दिवंगत पितरों को मोक्ष प्राप्त होता है।
मोक्षदा एकादशी की कथा मात्र से पितरों को मिलेगा मोक्ष, यहां पढ़ें महत्व और एकादशी की सही तिथि
जानिए मोक्षदा एकादशी से जुड़ी पौराणिक कथा(सौ.सोशल मीडिया)
Published on
Updated on

Mokshada Ekadashi Vrat Katha 2025: सोमवार 1 दिसंबर 2025 को मोक्षदा एकादशी मनाई जा रही है। हिन्दू धर्म में मोक्षदा एकादशी को बड़ा महत्व दिया जाता है। क्योंकि, मोक्षदा एकादशी पापों का नाश करने वाली और मोक्ष देने वाली एकादशी माना जाता है। हिन्दू मान्यता अनुसार, एकादशी के दिन जगत के पालनहार श्रीहरि भगवान विष्णु और धन की देवी मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करने का विधान है।

हिंदू धर्म के अनुसार, सिर्फ एकादशी का व्रत रखने से ही नहीं, बल्कि इसकी कथा पढ़ने और सुनाने से भी बहुत पुण्य मिलता है। ऐसा माना जाता है कि इस व्रत के प्रभाव से नरक में कष्ट झेल रहे पूर्वजों को भी मुक्ति मिलती है। ऐसी मान्यता है कि,यह एकादशी खास तौर पर पितरों को मोक्ष दिलाने वाली होती है।

जानिए मोक्षदा एकादशी से जुड़ी पौराणिक कथा

यह कथा विष्णु पुराण और पद्म पुराण में वर्णित है। कथा के अनुसार, गोकुल नामक नगर में वत्स नामक राजा राज्य करता था। राजा धर्मप्रिय था और अपनी प्रजा का पुत्रवत पालन करता था। एक रात राजा ने स्वप्न में देखा कि उसके पिता नरक में कष्ट भोग रहे हैं। वे रो रहे हैं और मदद की गुहार लगा रहे हैं। दुखी होकर राजा ने ऋषियों से उपाय पूछा। ऋषि ने बताया कि उनके पिता अपने जीवनकाल में अपनी पत्नी यानी राजा की माता को बहुत कष्ट देते थे। उसी पाप का परिणाम उन्हें नरक में भोगना पड़ रहा है। हालांकि, ऋषियों ने उन्हें उपाय भी बताया।

ऋषियों ने बताया कि मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की एकादशी का व्रत करके और भगवान विष्णु की पूजा करके वह अपने पिता को मुक्ति दिला सकते हैं। राजा वत्स ने पूरी निष्ठा से एकादशी व्रत किया, विष्णु भगवान की पूजा की, दान-पुण्य किया और अंत में व्रत का संपूर्ण पुण्य अपने पिता को अर्पित कर दिया। परिणामस्वरूप उसके पिता को मोक्ष प्राप्त हुआ।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com