नवरात्रि में स्थापित कलश की सामग्री का क्या करना चाहिए, जानिए ज्योतिषाचार्य के अनुसार
नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना के दौरान कलश स्थापित किया जाता है। इस दौरान नवरात्रि के अंतिम दिन दशमी तिथि पर कलश विसर्जन करने का नियम होता हैं। इस प्रकार से अगर आप कलश में रखी सामग्री को विसर्जित करना चाहते हैं तो इसके लिए कई बातों का ख्याल रखना चाहिए।
- Written By: दीपिका पाल
शारदीय नवरात्रि उपाय (सो.सोशल मीडिया)
Shardiya Navratri Kalash Viserjan: शारदीय नवरात्रि की जहां पर अंतिम तिथि यानि महानवमी है इस दिन माता सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना के दौरान कलश स्थापित किया जाता है। इस दौरान नवरात्रि के अंतिम दिन दशमी तिथि पर कलश विसर्जन करने का नियम होता हैं। इस प्रकार से अगर आप कलश में रखी सामग्री को विसर्जित करना चाहते हैं तो इसके लिए कई बातों का ख्याल रखना चाहिए। चलिए जानते हैं देवघर के ज्योतिषाचार्य द्वारा कलश स्थापना के नियम।
कलश विसर्जन के क्या होते हैं नियम
यहां पर बात करें तो, देवघर के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित नंदकिशोर मुद्गल ने कलश विसर्जन को लेकर बात कही है। इसमें बताया कि, नवरात्रि के प्रतिपदा तिथि में कलश स्थापना की जाती है और दशमी तिथि के दिन कलश विसर्जन करने का नियम होता हैं। कलश को विसर्जित करने के दौरान पवित्र नदी में जाकर पहले कलश में मौजूद गंगाजल को एक बर्तन में रख लें, या फिर आम्रपल्लव से पूरे घर में उस गंगाजल का छिड़काव करना चाहिए।
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कहा जाता हैं कि, नवरात्रि के इस कलश में जो सिक्का होता है, उसे लाल कपड़े में बांधकर घर की तिजोरी में रखना चाहिए। इससे आर्थिक समृद्धि बढ़ती हैं। इसके अलावा इन कार्यों को करने से माता दुर्गा का आशीर्वाद पूरे साल आपके घर पर बना रहता है। बता दें कि, कलश में गंगाजल, हल्दी, सिक्का, अक्षत, पंचपल्लव आदि पूजा सामग्री डाली जाती है जिसे विसर्जन के दौरान प्रवाहित किया जाता है।
नौं दिनों का त्योहार होता है नवरात्रि
हिंदू धर्म में नवरात्रि का महत्व होता हैं जो साल में कई बार मनाई जाती हैं इसमें ही शारदीय औऱ चैत्र नवरात्रि दोनों सबसे ज्यादा खास नवरात्रि होती है। नवरात्रि के नौ दिनों माता के नौ स्वरूप की पूजा विधि-विधान के साथ की जाती है। इसके अलावा दशमी तिथि को दशहरा का त्योहार मनाया जाता है।
