शिवलिंग और ज्योतिर्लिंग में क्या है अंतर, कितने प्रकार के होते हैं शिवलिंग

अधिकतर लोग शिवलिंग और ज्योतिर्लिंग को एक समझ लेते हैं लेकिन बता दें, दोनों के बीच बहुत बड़ा अंतर होता है। शिव पुराण में दोनों का अलग-अलग अर्थ भी बताया गया है। जानिए दोनों के बीच अंतर।
शिवलिंग और ज्योतिर्लिंग में क्या है अंतर, कितने प्रकार के होते हैं शिवलिंग
ज्योतिर्लिंग और शिवलिंग (सौ.सोशल मीडिया)
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Jyotirlinga and Shivling: सावन का पावन महीना चल रहा है। ये महीना भगवान शिव की भक्ति और साधना के लिए सबसे शुभ एवं उत्तम माना जाता है। कहा जाता है कि सावन महीने में जो भी शिव भक्त भगवान भोलेनाथ का प्रतीक शिवलिंग की पूजा- अर्चना करता है उसकी हर इच्छा भगवान भोलेनाथ पूरी करते हैं। क्या आपको पता है कि शिवलिंग और ज्योतिर्लिंग क्या अंतर होता है।

आपको बता दें, अधिकतर लोग शिवलिंग और ज्योतिर्लिंग को एक समझ लेते हैं लेकिन बता दें, दोनों के बीच बहुत बड़ा अंतर होता है। शिव पुराण में दोनों का अलग-अलग अर्थ भी बताया गया है। तो यहां जानिए आखिर ज्योतिर्लिंग और शिवलिंग के बीच क्या अंतर है।

क्या अंतर है ज्योतिर्लिंग और शिवलिंग में-

शिव पुराण के अनुसार, भगवान शिव जहां-जहां प्रकाश यानी ज्योति के रूप में प्रकट हुए उसे ज्योतिर्लिंग कहा जाता है। बता दें कि हमारे देश में कुल 12 ज्योतिर्लिंग हैं। जो भारत के अलग अलग हिस्सों में स्थित है। मान्यताओं के अनुसार, 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन करने से महादेव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

वहीं,अगर बात शिवलिंग की करें तो शिवलिंग उसे कहते हैं, जिसे मनुष्यों द्वारा बनाया गया है या खुद प्रकट हुए हैं। शिव पुराण के मुताबिक, शिवलिंग का अर्थ अनंत होता है, जिसका कोई अंत नहीं है।

भगवान शिव के प्रतीक के रूप में शिवलिंग का निर्माण भक्तों ने पूजा-पाठ और प्राण प्रतिष्ठा कर घर में स्थापित करने के लिए किया है। शिवलिंग की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है और पूरे परिवार पर भोले शंकर का आशीर्वाद बना रहता है।

भारत में कुल 12 प्रमुख ज्योतिर्लिंग हैं (12 jyotirlinga names and places list in hindi)

1. सोमनाथ, गुजरात 2. मल्लिकार्जुन, आंध्र प्रदेश 3. महाकालेश्वर, उज्जैन 4. ओंकारेश्वर, मध्य प्रदेश 5. केदारनाथ, उत्तराखंड 6. भीमाशंकर, महाराष्ट्र 7. काशी विश्वनाथ, उत्तर प्रदेश 8. त्र्यंबकेश्वर, महाराष्ट्र 9. बैद्यनाथ, झारखंड 10. नागेश्वर, गुजरात 11. रामेश्वरम, तमिलनाडु 12. घृष्णेश्वर, महाराष्ट्र

शिवलिंग कई प्रकार के होते हैं-

अंडाकार शिवलिंग-

यह शिवलिंग मनुष्य द्वारा निर्मित होता है।

पारद शिवलिंग-

यह पारा धातु से बना शिवलिंग होता है, जिसे मनुष्य द्वारा बनाया जाता है।

स्वयंभू शिवलिंग-

जहां शिवलिंग स्वयं प्रकट हुआ हो, जैसे ज्योतिर्लिंग।

देव शिवलिंग-

देवताओं द्वारा स्थापित शिवलिंग को देव शिवलिंग कहते हैं।

असुर शिवलिंग-

राक्षसों द्वारा स्थापित शिवलिंग को असुर शिवलिंग कहते हैं।

पौराणिक शिवलिंग-

पौराणिक काल के लोगों द्वारा स्थापित शिवलिंग को पौराणिक शिवलिंग कहते हैं।

मानव शिवलिंग-

मनुष्य द्वारा निर्मित शिवलिंग जैसे पत्थर, धातु, मिट्टी, गोबर या अन्य सामग्रियों से बने शिवलिंग।

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