अहोई अष्टमी के व्रत में क्या खा सकते हैं, और जानिए कब करना चाहिए व्रत का पारण
Ahoi Ashtami Puja :अहोई अष्टमी का व्रत भी करवा चौथ के जैसा ही कठोर होता है। इस दिन महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं और अन्न-जल ग्रहण नहीं करती है। शाम को व्रत का पारण करते समय सात्विक भोजन करना चाहिए।
- Written By: सीमा कुमारी
अहोई अष्टमी के व्रत में क्या खा सकते हैं (सौ.सोशल मीडिया)
Ahoi Ashtami Puja Muhurat : अहोई अष्टमी का व्रत हर साल कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि के दिन रखा जाता है। यह व्रत करवा चौथ के चार और दिवाली के आठ दिन पहले मनाया जाता है। इस व्रत का हिंदू धर्म शास्त्रों में विशेष महत्व रखता है।
जैसा कि आप जानते हैं कि, ये व्रत संतानवती महिलाएं अपने संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और खुशहाल जीवन की कामना के लिए रखती है। हिन्दू शास्त्रों के अनुसार, अहोई अष्टमी को लेकर कई नियम बताए गए हैं, जिसका पालन करना बेहद जरुरी होता है। ऐसे में आइए जानते हैं अहोई अष्टमी के व्रत में क्या-क्या खाया जाता है और इसका पारण कब किया जाता है।
अहोई अष्टमी के व्रत में खाई जाती हैं क्या चीजें
अहोई अष्टमी का व्रत भी करवा चौथ के जैसा ही कठोर होता है। इस दिन महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं और अन्न-जल ग्रहण नहीं करती है। शाम को व्रत का पारण करते समय सात्विक चीजें जैसे- सूखे मेवे, साबूदाना और फल का सेवन किया जा सकता है।
सम्बंधित ख़बरें
Ashadha Amavasya 2026: आषाढ़ अमावस्या पर इन 5 गुप्त दानों से बदल सकती है किस्मत! पितरों का मिलेगा आशीर्वाद
Sawan 2026: सावन में इन 4 चमत्कारी पौधों की पूजा खोल सकती है किस्मत के बंद दरवाजे
Kark Sankranti 2026: 16 जुलाई को खुलेंगे पुण्य के दुर्लभ द्वार! इस खास समय में किया गया एक काम बदल सकता है भाग
सोमवार को शिवलिंग पर चढ़ा दें ये 8 पवित्र चीजें… कहते हैं महादेव जल्दी सुन लेते हैं सच्चे भक्त की पुकार
अहोई अष्टमी के व्रत का पारण कब किया जाता है
अहोई अष्टमी के दिन महिलाएं शाम को गोलाधि बेला तक अपनी संतान के लिए उपवास करती हैं। शाम को आसमान में तारों के दर्शन के बाद ही इस व्रत का पारण किया जाता है। कुछ स्थानों पर इस व्रत का पारण चंद्र दर्शन के बाद किए जाने की परंपरा है। आमतौर पर अहोई अष्टमी के दिन चांद थोड़ा देर से दिखाई देता है।
अहोई अष्टमी व्रत की पूजन विधि
- अहोई अष्टमी के दिन सुबह स्नान आदि से निवृत्त होकर अहोई माता के सामने व्रत का संकल्प लें।
- फिर एक गेरु से अहोई माता का चित्र बनाएं या आप चाहें तो बाज़ार से भी अहोई माता का चित्र ला सकते हैं।
- फिर सूर्यास्त के बाद तारे निकलने पर अहोई माता की पूजा करें।
- इस पूजा में जल से भरे एक कलश, सफेद धातु या चांदी की अहोई, कुछ फूल, दूध, हलवा, उबले चावल और घी के दीपक की जरूरत होती है।
- सबसे पहले अहोई माता को तिलक लगाया जाता है फिर उन्हें फूल अर्पित किए जाते हैं।
- माता के सामने घी का दीपक जलाया जाता है।
- फिर अहोई माता को दूध और उबले चावल प्रसाद रूप में चढ़ाए जाते हैं।
- इसके बाद गेहूं के सात दाने और साथ में दक्षिणा के लिए कुछ पैसे अपने हाथ में लें।
- फिर सच्चे मन से अहोई माता की कथा सुनें।
- कथा के बाद गेहूं के दाने और दक्षिणा अपनी सास को दें और फिर उनके पैर छूकर उनका आशीर्वाद लें।
- फिर तारों या फिर चंद्रमा को अर्घ्य देकर अपना व्रत खोल लें।
ये भी पढ़ें-करवा चौथ पर चांद को मिट्टी के करवे से ही अर्घ्य देने का खुल गया रहस्य, त्रेतायुग से है विशेष संबंध
अहोई अष्टमी के दिन राधा कुंड स्नान का महत्व
कहते हैं जिन जोड़ों को संतान प्राप्ति में समस्या आ रही है उन्हें अहोई अष्टमी के दिन राधा कुंड में डुबकी लगाकर और इस पवित्र कुंड में खड़े होकर राधा रानी की पूजा करनी चाहिए। माना जाता है कि इससे संतान सुख अवश्य प्राप्त होता है। इसी मान्यता के कारण हर साल अहोई अष्टमी के दिन कई शादीशुदा जोड़े एक साथ रात में राधा कुंड के पवित्र जल में डुबकी लगाते हैं।
