बिहू में मौसम की पहली फसल किसे की जाती है अर्पित, जानिए पूजा का शुभ मुहूर्त और बिहू का महत्व
आज 15 जनवरी, 2025 को माघ बिहू का त्योहार मनाया जा रहा है। इस पावन अवसर पर लोग विभिन्न तरह के पूजन नियमों का पालन करते हैं, जिनका अपना एक अलग ही महत्व है।
- Written By: सीमा कुमारी
असम का प्रमुख त्योहार माघ बिहू,(सौ.सोशल मीडिया)
Magh Bihu 2025: माघ बिहू असम का प्रमुख त्योहार है। यह पर्व असम के नव वर्ष की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। यह माघ महीने के पहले दिन मनाया जाता है। इस साल माघ बिहू का त्योहार आज 15 जनवरी, 2025 को मनाया जा रहा है। इस पावन अवसर पर लोग विभिन्न तरह के पूजन नियमों का पालन करते हैं, जिनका अपना एक अलग ही महत्व है, तो ऐसे में आइए जानते है इस दिन से जुड़ी महत्वपूर्ण बातों के बारे में-
क्या है बिहू 2025 शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, बिहू पर्व 15 जनवरी से शुरू हो रहा है। इस दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5 बजकर 27 मिनट से सुबह 6 बजकर 21 मिनट तक रहेगा। साथ ही विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 16 मिनट से दोपहर 2 बजकर 58 मिनट तक रहगा।
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इसके अलावा गोधूलि मुहूर्त शाम 5 बजकर 44 मिनट से 6 बजकर 11 मिनट तक रहेगा। इसके अलावा निशिता मुहूर्त रात 12 बजकर 04 मिनट से अगले दिन 12 बजकर 58 मिनट तक रहेगा।
इस विधि से करें माघ बिहू के दिन पूजा
इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें। फिर अग्नि देव का ध्यान कर उनकी विधिवत पूजा करें। साथ ही लोग इस मौके पर बांस और पत्तों से बनी झोपड़ी को जलाते हैं।
फिर सुबह इसकी राख को अपनी-अपनी फसलों में छिड़क देते हैं, जिससे फसल अच्छी होती है। इसके अलावा भक्त अग्नि देव से प्रार्थना करें और उन्हें चावल-सुपारी अर्पित करें। इसके बाद उनकी स्तुति का पाठ करें।
पूजा समाप्त होने के बाद घर के लोगों व अन्य सदस्यों में प्रसाद बांटें। इस मौके पर गरीबों की मदद करें और उन्हें कुछ दान-दक्षिणा दें।
क्या है माघ बिहू के महत्व
माघ बिहू का त्योहार असम का सबसे प्रमुख पर्व माना जाता है। ये पर्व सर्दियों के मौसम के अंत के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। किसानों के द्वारा ये त्योहार बहुत धूमधाम के साथ मनाया जाता है। इस त्योहार में भगवान को अच्छी फसल के लिए धन्यवाद दिया जाता है।
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माघ बिहू के दिन लोक व्यंजन आलू पितिका, जाक और मसोर टेंगा बनाया जाता है और सब मिलकर भोज करते हैं। इस पर्व के दिन किसानों के द्वारा ब्राई शिबराई देवता को मौसम की पहली फसल अर्पित की जाती है और आने वाले समय में अच्छे फसल की कामना करते हैं।
