मणिकरण शिव मंदिर (सौ.सोशल मीडिया)
Shiva Mandir: भारत में ऐसे ही कई प्राचीन मंदिर है इन मंदिरों की अपनी ही एक अलग खासियत होती है। इन मंदिरों से जुड़ी मान्यताओं और रहस्य भी काफी होते है जिसके बारे में शायद ही किसी को जानकारी होती है। ऐसे में भगवान शिव के ऐसे ही प्राचीन मंदिर है जिनके बारे में हर कोई जानता है। लेकिन भगवान शिव का एक ऐसा ही अनोखा मंदिर है जहां पर कड़कती ठंड में कुछ ऐसा होता है जिनके बारे में कम ही लोग जानते है। चलिए जानते है हिमाचल प्रदेश के इस रहस्यमयी मंदिर के बारे में।
भगवान शिव का प्रसिद्ध मंदिर हिमाचल प्रदेश के कुल्लू से लगभग 45 किलोमीटर दूर मणिकर्ण में स्थित है जहां पर केवल हिंदू ही नहीं बल्कि सिख धर्म के लोग भी पूजा करने के लिए आते है। इसका कारण यह है कि, यहां पर एक तरफ शिव मंदिर है और दूसरी तरफ गुरु नानक देव का ऐतिहासिक गुरुद्वारा है। इस गुरुद्वारे को मणिकर्ण साहिब के नाम से जाना जाता है। कहा जाता है कि, सर्दी के समय में यहां पर नदी का पानी उबलता है ऐसा क्यों होता है इस रहस्य के बारे में शायद ही कोई जानते है।
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यहां पर इस मंदिर की पौराणिक कथा धार्मिक ग्रंथों में प्रचलित है। शिव जी को भोलेनाथ कहा जाता है, लेकिन जब वह क्रोध आता है तब उनके प्रकोप से कोई भी नहीं बचता है। इसे लेकर एक कहानी यह है कि, एक बार की बात है कि, नदी में क्रीड़ा करते हुए माता पार्वती की के कान का कुंडल का मणि पानी में गिर गया था, जो बहते हुए पाताल लोक पहुंच गया था।कहा जाता है जिसके बाद भगवान शिव ने मणि को ढूंढने के लिए अपने गणों को भेजा, लेकिन बहुत ढूंढने पर भी वह उन्हें मणि नहीं मिली. जिससे भगवान शिव नाराज हो गए और अपना विकराल रूप धारण कर अपने तीसरा नेत्र खोल लिया।
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महादेव के क्रोध के कारण नदी का पानी उबलने लगा। इसके बाद से यहां पर आज तक नदी का पानी उबलता रहता है।भगवान शिव का यह विकराल रूप देखकर नैना देवी प्रकट हुई और उन्होंने पाताल में जाकर शेषनाग से भगवान शिव को यह मणि वापस लौटाने को कहा. जिसके बाद शेषनाग ने महादेव को माता पार्वती की मणि लौटा दी. शेषनाग ने पाताल लोक से जोर की फुंकार भरी और जगह-जगह ढेर सारी मणियां भी धरती लोक पर आ गईं. माता पार्वती की मणि मिलने के बाद भगवान शिव ने उन सभी मणियों को पत्थर बनाकर नदी में वापस डाल दिया।
कहा जाता है कि, इस नदी का जल रोगों से मुक्ति दिलाने वाला है। कहते हैं यह नदी काफी चमत्कारिक है इस पवित्र जल में स्नान करता है, उनके सभी त्वचा के रोग खत्म हो जाते हैं। इसे लेकर भी एक मान्यता प्रचलित मानी जाती है श्रीराम ने कई बार इस जगह पर भगवान शिव की आराधना और तपस्या की थी। आज भी श्रीराम की तपस्या स्थली मणिकर्ण में भगवान राम का एक पुराना और भव्य मंदिर बना हुआ है।