आज सोम प्रदोष व्रत पर प्रदोष काल में करें पूजा, जरूर पढ़ें या सुने ये व्रत कथा
Som Pradosh Vrat Puja Vidhi: धर्म ग्रथों में सोम प्रदोष व्रत के दिन पूजा के समय व्रत कथा का जरूर करना चाहिए। वरना पूजा अधूरी मानी जाती है। आइए पढ़ते हैं प्रदोष व्रत कथा
- Written By: सीमा कुमारी
प्रदोष व्रत कथा(सौ.सोशल मीडिया)
Som Pradosh Vrat Katha:हिंदू धर्म में सोम प्रदोष व्रत की महिमा अपरंपार बताई गई है। कहा जाता है कि देवों के देव महादेव को एक लोटा जल अर्पित करने मात्र से वे प्रसन्न होकर अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी कर देते हैं।
ऐसे में आज 30 मार्च को हिंदू नववर्ष का पहला प्रदोष व्रत रखा जा रहा है। सोमवार होने के कारण इसे सोम प्रदोष व्रत कहा जाएगा। इस व्रत को सही विधि से रखने और प्रदोष काल में पूजा करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और भक्तों को सुख, शांति, स्वास्थ्य तथा मनोकामनाओं की पूर्ति का आशीर्वाद मिलता है।
धर्म ग्रथों में सोम प्रदोष व्रत के दिन पूजा के समय व्रत कथा का जरूर करना चाहिए। वरना पूजा अधूरी मानी जाती है। आइए पढ़ते हैं प्रदोष व्रत कथा-
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प्रदोष व्रत कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन समय में एक एक नगर में एक ब्राह्मणी रहा करती थी। वो बहुत गरीब थी। वो भिक्षा मांगकर अपना और अपने बच्चे का जीवन यापन कर रही रही थी। एक बार उसे नदी किनारे एक घायल बालक मिला। वो कोई आम बालक नहीं, बल्कि विदर्भ का राजकुमार था। बताया जाता है कि, उसके माता-पिता को मारकर उसका राज्य छीन लिया गया था।
ब्राह्मणी राजकुमार को अपने घर लेकर आ गई और अपने बेटे की तरह उसका पालन-पोषण करने लगी। कुछ समय बाद वो दोनों बालकों को लेकर ऋषि शांडिल्य के आश्रम गई। जहां ऋषि उनको मिले। ऋषि ने ब्राह्मणी और दोनों बालकों को सोम प्रदोष व्रत रखने और उसकी कथा पढ़ने को कहा। ऋषि की आज्ञा मानकर ब्राह्मणी और बालकों ने पूरी निष्ठा से सोम प्रदोष व्रत रखा और कथा पढ़ी।
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कुछ समय बाद, बड़ा होने पर राजकुमार की मुलाकात गंधर्व कन्या से हुई। कन्या का नाम अंशुमति था। राजकुमार और अंशुमती को एक-दूसरे से प्रेम हो गया। जब गंधर्व राज को विदर्भ के राकुमार की सच्चाई पता चली तो उन्होंने अपनी पुत्री का विवाह उससे कर दिया। विवाह के बाद, राजकुमार को गंधर्व सेना की मदद से अपना खोया हुआ राज्य वापस मिल गया।
राजकुमार ने उस ब्राह्मणी और उसके बेटे को राजमहल में स्थान दिया। सोम प्रदोष व्रत और कथा के प्रभाव से राजकुमार को उसका राज्य मिला और ब्राह्मणी की गरीबी सदा के लिए दूर हो गई।
