Lord Krishna (Source. Pinterest)
Krishna Indian History: महाभारत को केवल एक युद्ध कथा मानना भूल होगी, क्योंकि इसमें कई ऐसे रहस्य छिपे हैं जो आज भी लोगों को चौंका देते हैं। इन्हीं में से एक बड़ा रहस्य यह है कि महाभारत में सिर्फ एक नहीं, बल्कि तीन कृष्ण का उल्लेख मिलता है। यह बात बहुत कम लोग जानते हैं, लेकिन इसके पीछे गहरा धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व जुड़ा हुआ है।
महाभारत के पहले कृष्ण माने जाते हैं महर्षि वेदव्यास। उनका असली नाम “श्रीकृष्ण द्वैपायन” था। उनके नाम में “कृष्ण” इसलिए जुड़ा क्योंकि उनका रंग सावंला था और उनका जन्म द्वीप पर हुआ था। महर्षि वेदव्यास को भगवान विष्णु का अवतार भी माना जाता है। उन्होंने ही महाभारत की रचना की और वेदों का विभाजन किया, जिसके कारण वे “वेदव्यास” कहलाए। उनकी भूमिका केवल लेखक तक सीमित नहीं थी। उन्होंने धृतराष्ट्र, पांडु और विदुर के जन्म में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। साथ ही संजय को दिव्य दृष्टि देकर युद्ध का पूरा वर्णन सुनाने में मदद की। धार्मिक मान्यता के अनुसार, वे अष्ट चिरंजीवियों में से एक हैं, यानी आज भी जीवित माने जाते हैं।
महाभारत के दूसरे और सबसे प्रसिद्ध कृष्ण हैं भगवान श्रीकृष्ण। उन्होंने हर मुश्किल समय में पांडवों का साथ दिया और अर्जुन के सारथी बनकर कुरुक्षेत्र के युद्ध में विजय दिलाई। भगवान श्रीकृष्ण ने ही गीता का उपदेश देकर धर्म और कर्म का मार्ग दिखाया। उनकी रणनीति, बुद्धिमत्ता और धर्म के प्रति समर्पण ने उन्हें महाभारत का सबसे महत्वपूर्ण पात्र बना दिया।
महाभारत में तीसरे कृष्ण के रूप में एक ऐसा पात्र भी आता है, जिसे नकली कृष्ण कहा जाता है। यह थे पुंड्र देश के राजा पौंड्रक। पौंड्रक खुद को वासुदेव और भगवान विष्णु का अवतार मानता था। उसके चापलूस मित्रों ने उसे यह विश्वास दिला दिया था कि असली कृष्ण वही है, न कि द्वारका के श्रीकृष्ण। उसने भगवान कृष्ण की तरह ही शंख, चक्र, मुकुट और पीले वस्त्र धारण कर लिए और खुद को असली वासुदेव घोषित कर दिया।
इतना ही नहीं, उसने श्रीकृष्ण को संदेश भेजकर कहा कि “वासुदेव नाम और स्वरूप पर सिर्फ उसका अधिकार है।” भगवान श्रीकृष्ण ने लंबे समय तक उसकी बातों को नजरअंदाज किया, लेकिन जब हद पार हुई, तो उन्होंने युद्ध की चुनौती स्वीकार की और अंत में पौंड्रक का वध कर दिया।
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महाभारत में तीन कृष्ण का यह रहस्य हमें यह सिखाता है कि सत्य और असत्य के बीच फर्क समझना बेहद जरूरी है। जहां एक ओर सच्चे ज्ञान और धर्म का प्रतीक कृष्ण हैं, वहीं नकली रूप धारण करने वाला अंत में पराजित होता है।