कौन था कृतवर्मा? महाभारत का वह योद्धा जिसने पांडवों को भी चौंका दिया

Mahabharat के विशाल युद्ध में जहां अर्जुन, भीम और कर्ण जैसे महारथियों की चर्चा होती है, वहीं एक नाम ऐसा भी है जो कम सुना जाता है, लेकिन युद्धभूमि में उसका पराक्रम किसी से कम नहीं था।
Who was Kritavarma warrior of the Mahabharata who stunned even the Pandavas
Kritavarma (Source. Facebook)
Updated on

Who was Kritavarma: महाभारत के विशाल युद्ध में जहां अर्जुन, भीम और कर्ण जैसे महारथियों की चर्चा होती है, वहीं एक नाम ऐसा भी है जो कम सुना जाता है, लेकिन युद्धभूमि में उसका पराक्रम किसी से कम नहीं था। यह योद्धा था कृतवर्मा। आखिर कौन था कृतवर्मा और महाभारत में उसकी क्या भूमिका रही? आइए विस्तार से जानते हैं।

यदुवंशी वीर और कौरवों का अतिरथी

कृतवर्मा यदुवंश के अंतर्गत भोजराज हृदिक का पुत्र था। वह वृष्णि वंश के सात प्रमुख सेनानायकों में गिना जाता था। महाभारत युद्ध में उसने एक अक्षौहिणी सेना के साथ दुर्योधन का साथ दिया। कौरव पक्ष की ओर से वह एक अतिरथी योद्धा था, यानी ऐसा महारथी जो अकेले हजारों योद्धाओं का सामना कर सके। जब मथुरा पर आक्रमण हुआ, तब श्रीकृष्ण ने कृतवर्मा को पूर्वी द्वार की रक्षा का दायित्व सौंपा था। इससे स्पष्ट होता है कि वह कृष्ण के विश्वसनीय और सक्षम योद्धाओं में से एक था।

रणभूमि में दिखाया अद्भुत पराक्रम

कृतवर्मा ने कई भीषण युद्धों में अपनी वीरता साबित की। एक युद्ध में उसने बाणासुर के मंत्री कूपकर्ण को पराजित किया था। महाभारत के युद्ध के दौरान भी उसने अनेक बार पांडव सेना को पीछे हटने पर मजबूर किया। भीमसेन, युधिष्ठिर, धृष्टद्युम्न और उत्तमौजा जैसे पराक्रमी योद्धाओं से उसका सामना हुआ और कई अवसरों पर उसने उन्हें परास्त भी किया। 'द्वैपायन सरोवर' पर जाकर उसी ने दुर्योधन को पुनः युद्ध के लिए प्रेरित किया था।

सौप्तिक युद्ध और विवादित भूमिका

महाभारत के अंत में हुए 'सौप्तिक युद्ध' में कृतवर्मा ने अश्वत्थामा का साथ दिया। इस रात्रि युद्ध में पांडव शिविर पर आक्रमण किया गया, जहां सोए हुए योद्धाओं का वध हुआ। उल्लेख मिलता है कि शिविर में आग भी लगाई गई थी। इस घटना ने युद्ध के अंतिम चरण को और भी भयावह बना दिया। हालांकि, कृतवर्मा ने शतधंवा की सहायता करने से इनकार कर दिया था, जो उसके निर्णयों की जटिलता को दर्शाता है।

मौसल युद्ध में अंत और स्वर्ग गमन

महाभारत के बाद हुए ‘मौसल युद्ध’ में सात्यकि के हाथों कृतवर्मा का वध हुआ। ग्रंथों के अनुसार, मृत्यु के पश्चात उसे स्वर्ग में स्थान मिला और उसका प्रवेश मरुद्गणों में हुआ। कृतवर्मा का जीवन वीरता, निष्ठा और विवादों से भरा रहा। वह उन योद्धाओं में था, जिनकी भूमिका ने महाभारत के इतिहास को गहराई से प्रभावित किया।

Navbharat Live
navbharatlive.com