विश्वकर्मा पूजा में अवश्य गाएं यह विशेष आरती, अन्यथा अधूरी रह जाएगी पूजा, जानिए पूजा की सही तिथि और शुभ मुहूर्त
सनातन धर्म में विश्वकर्मा पूजा एक विशेष रखता है। इसे विश्वकर्मा जयंती व विश्वकर्म दिवस के नाम से भी जाना जाता है, जो ब्रह्मांड के दिव्य वास्तुकार भगवान विश्वकर्मा की पूजा के लिए समर्पित है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान विश्वकर्मा ने रावण की लंका, कृष्ण नगरी द्वारिका, पांडवों के लिए इंद्रप्रस्थ नगरी और हस्तिनापुर का निर्माण किया था। भगवान विश्वकर्मा की पूजा सृष्टि के सृजन करता के रूप में की जाती है।
- Written By: सीमा कुमारी
विश्वकर्मा पूजा में अवश्य गाएं यह विशेष आरती, अन्यथा अधूरी रह जाएगी पूजा, जानिए पूजा की सही तिथि और शुभ मुहूर्त
आज सृष्टि के रचयिता भगवान ‘विश्वकर्मा’ की जयंती (Vishwakarma Puja 2024) पूरे देश भर में मनाई जा रही है। सनातन धर्म में विश्वकर्मा पूजा एक विशेष रखता है। इसे विश्वकर्मा जयंती व विश्वकर्म दिवस के नाम से भी जाना जाता है, जो ब्रह्मांड के दिव्य वास्तुकार भगवान विश्वकर्मा की पूजा के लिए समर्पित है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान विश्वकर्मा ने रावण की लंका, कृष्ण नगरी द्वारिका, पांडवों के लिए इंद्रप्रस्थ नगरी और हस्तिनापुर का निर्माण किया था। भगवान विश्वकर्मा की पूजा सृष्टि के सृजन करता के रूप में की जाती है। भगवान विश्वकर्मा जी की पूजा के बाद आरती जरूर करनी चाहिए, क्योंकि मान्यता है कि बिना आरती के पूजा अधूरी मानी जाती है। आप अगर विश्कर्मा जी की पूजा करने जा रहे है तो आरती जरूर पढ़ें।
तिथि और समय
सम्बंधित ख़बरें
शिल्प देव भगवान विश्वकर्मा आराधना की रही धूम, सामाजिक संस्थाओं की ओर से पूजा का आयोजन
आज विश्वकर्मा पूजा में पाना चाहते है भगवान का आशीर्वाद, इस चालीसा का करें सुबह-सुबह पाठ
विश्वकर्मा पूजा के दिन किए गए इन उपायों से बढ़ेगा धन-वैभव, नहीं होगी आर्थिक तंगी
विश्वकर्मा पूजा की तिथि को लेकर कन्फ्यूजन क्यों, यहां जानिए सही तिथि और पूजा का शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, इस साल विश्वकर्मा पूजा के लिए जरूरी कन्या संक्रांति 16 सितंबर को है। इस दिन सूर्य देव शाम को 07 बजकर 53 मिनट पर कन्या राशि में प्रवेश करेंगे। परिवर्तन के समय को ही कन्या संक्रांति कहा जाता है। हिंदू धर्म में उदया तिथि मान्य होती है, इसलिए विश्वकर्मा पूजा 17 सितंबर यानी मंगलवार के दिन मनाई जाएगी।
।।विश्वकर्मा जी की आरती।।
ॐ जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा।
सकल सृष्टि के कर्ता, रक्षक श्रुति धर्मा॥ ॐ जय…
आदि सृष्टि में विधि को श्रुति उपदेश दिया।
जीव मात्रा का जग में, ज्ञान विकास किया॥ ॐ जय…
ऋषि अंगिरा ने तप से, शांति नहीं पाई।
ध्यान किया जब प्रभु का, सकल सिद्धि आई॥ ॐ जय…
रोग ग्रस्त राजा ने, जब आश्रय लीना।
संकट मोचन बनकर, दूर दुःख कीना॥ ॐ जय…
जब रथकार दंपति, तुम्हरी टेर करी।
सुनकर दीन प्रार्थना, विपत हरी सगरी॥ ॐ जय…
एकानन चतुरानन, पंचानन राजे।
त्रिभुज चतुर्भुज दशभुज, सकल रूप सजे॥ ॐ जय…
ध्यान धरे जब पद का, सकल सिद्धि आवे।
मन दुविधा मिट जावे, अटल शक्ति पावे॥ ॐ जय…
‘श्री विश्वकर्मा जी’ की आरती, जो कोई नर गावे।
कहत गजानंद स्वामी, सुख संपति पावे॥ ॐ जय…
