

Eco Friendly Ganesha idol: गणेश चतुर्थी के अवसर पर कई घरों में गणपति बप्पा की स्थापना की जाती है और फिर विसर्जन की जाती है। लेकिन इस बार आप इस परंपरा को थोड़ा अलग अंदाज से भी कर सकते हैं। बाजार में ट्री गणेशा या प्लांटेबल गणेशा जैसे विकल्प भी मौजूद हैं।
ट्री गणेशा एक ऐसी इको-फ्रेंडली प्रतिमा होती है, जिसे प्राकृतिक मिट्टी और बीजों से तैयार किया जाता है। मूर्ति के अंदर ऐसे बीज रखे जाते हैं, जो पानी और उचित परिस्थितियां मिलने पर अंकुरित होने लगते हैं। यानी बप्पा की प्रतिमा के विसर्जन के बाद उनकी जगह एक पौधा आपके घर में बढ़ सकता है। विसर्जन के बाद यही बीज मिट्टी में अंकुरित होकर पौधे का रूप ले लेते हैं।
ट्री गणेशा की सबसे खास बात इसका घर पर प्लांटेबल विसर्जन है। मूर्ति को किसी बड़े गमले या मिट्टी से भरे कंटेनर में रखा जा सकता है। इसके बाद धीरे-धीरे पानी डालकर मूर्ति को मिट्टी में मिलाया जाता है। समय के साथ मूर्ति मिट्टी में घुलती जाती है और उसमें मौजूद बीज अंकुरित होने लगते हैं। यही बीज एक पौधे का रूप ले लेते हैं।
इको-फ्रेंडली गणपति का विकल्प चुनने का मकसद त्योहार की खुशी के साथ-साथ पर्यावरण का भी ख्याल रखना होता है। प्राकृतिक मिट्टी से बनी प्रतिमाएं पानी में आसानी से घुल जाती हैं, जबकि प्लास्टर ऑफ पेरिस और कुछ आर्टिफिशियल कलर विसर्जन के बाद जल स्त्रोतों को भी खराब करती हैं। नदी, तालाब या आसपास के झील का पानी भी दूषित हो जाता है। मिट्टी, पेपर पल्प और अन्य प्राकृतिक सामग्री से बनी गणेश प्रतिमाओं को पर्यावरण के अनुकूल तैयार किया जाता है। जिससे आस्था और परंपरा दोनों बनी रहती है।
अगर आपको प्लांटेबल गणेशा नहीं मिलता है या आपके घर में प्लांट की जगह नहीं है, तो सादी प्राकृतिक मिट्टी, पेपर पल्प या प्राकृतिक रंगों से बनी गणेश प्रतिमा का भी चुनाव किया जा सकता है। इससे भी सुरक्षित विकल्प है, घर पर मिट्टी लाकर बप्पा की प्रतिमा को अपने हाथों से तैयार करना।
ट्री गणेशा की खूबसूरती सिर्फ इसकी प्रतिमा में नहीं, बल्कि इसके द्वारा दिए जा रहे विचार में है। विसर्जन के बाद खत्म होने के बजाय बप्पा के आशीर्वाद के रूप में एक पौधा हमेशा आपके पास रहेगा।