2 फरवरी को मनाई जाएगी बसंत पंचमी, इस दिन पीला रंग धारण करने की होती है परंपरा, जानिए वजह
कहते हैं बसंत पंचमी के दिन माता सरस्वती की पूजा के साथ ही पीला रंग धारण करने का महत्व होता है। बसंत पंचमी के दिन विद्या की देवी मां सरस्वती (Maa Saraswati) का पूजन अर्चना किया जाता है।
- Written By: दीपिका पाल
बसंत पंचमी पर पीला रंग पहनने का महत्व (सौ.सोशल मीडिया)
Basant Panchami 2025: साल 2025 में मकर संक्रांति के साथ ही व्रत और त्योहार की शुरुआत हो चुकी है। आने वाले महीने 2 फरवरी को बसंत पंचमी मनाई जाएगी जो हर साल माघ महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाने के लिए खास होता है। बसंत पंचमी को ऋतु के बदलाव के साथ की जाती है वहीं पर इस दिन माता सरस्वती के पूजन का महत्व होता है। कहते हैं इस दिन माता सरस्वती की पूजा के साथ ही पीला रंग धारण करने का महत्व होता है। बसंत पंचमी के दिन विद्या की देवी मां सरस्वती (Maa Saraswati) का पूजन अर्चना किया जाता है।
जानें क्या होती है पीला रंग पहनने की परंपरा
आपको बताते चले कि, बसंत पंचमी के दिन माता सरस्वती के पूजन के साथ ही पीले रंग का महत्व होता है। यहां पर ठंड के मौसम की समाप्ति के साथ ही वसंत ऋतु का आगमन होता है इस दौरान वातावरण में बदलाव होता है। इसके अलावा जिससे पेड़ों पर नई-नई पत्तियां खिलने लगती है. वहीं इस दौरान देश के कई राज्यों में सरसों की फसलों की वजह से भी, धरती का रंग पीला नजर आने लगता है।
कहते है, बसंत पंचमी के दिन से नए कार्य की शुरुआत की जाती है यानि इस दिन को नई शुरुआत और ऊर्जा का दिन माना जाता है। गृह प्रवेश हो या नया व्यवसाय प्रारंभ करना हो, अगर आपको कोई भी उपयुक्त मुहूर्त न मिल रहा हो तो आप बसंत पंचमी की तिथि पर उस कार्य की शुरुआत या फिर उसे संपन्न कर सकते हैं।
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जानिए क्या होती है बसंत पंचमी के पूजन की विधि
यहां पर बसंत पंचमी के पूजन की विधि होती है इसके नियम होते है। मां सरस्वती की प्रतिमा स्थापित कर उनकी पूजा अर्चना की जाती है जिसके पश्चात अगले दिन उसी प्रतिमा का पूरे विधि-विधान अनुसार विसर्जन कर दिया जाता है. मान्यताओं के अनुसार इस दिन पीला वस्त्र धारण करने, हल्दी से मां सरस्वती की पूजा करने और उस हल्दी का तिलक लगाने की भी परंपरा है. माना गया है कि ऐसा करने से मां सरस्वती की अपार कृपा प्राप्त होती है।
