आज बसंत पंचमी पर बांके बिहारी मंदिर में क्यों उड़ा गुलाल? जानिए कितने दिनों तक रंगा रहेगा ब्रज?
Holi 40 days in Braj:बसंत पंचमी के पावन दिन ब्रज में होली का शंखनाद बज गया। ब्रज में यह उत्सव 40 दिन तक चलता है, जिसमें हर दिन अलग तरह की होली और रंगों की धूम रहती है।
- Written By: सीमा कुमारी
ब्रज में होली का शंखनाद (सौ.सोशल मीडिया)
Braj Holi Festival: कान्हा की नगरी मथुरा में आज बसंत पंचमी के पावन अवसर के साथ ही विश्व प्रसिद्ध ब्रज की होली का शुभारंभ हो गया। वृंदावन के विश्व विख्यात ठाकुर बांके बिहारी मंदिर में आज सुबह से ही अबीर-गुलाल उड़ना शुरू हो गया, जिससे पूरा मंदिर परिसर रंगीन छटा में सराबोर हो गया।
ब्रज की परंपरा के अनुसार, बसंत पंचमी के दिन ‘होली का ढांडा’ गाड़ने के साथ ही 40 दिवसीय होली महोत्सव की शुरुआत हो जाती है। आज यानि शुक्रवार को बांके बिहारी मंदिर में उमड़े हजारों श्रद्धालुओं ने अपने आराध्य के साथ जमकर होली खेली।
जैसे ही मंदिर के पुजारियों ने भक्तों पर गुलाल छिड़कना शुरू किया, पूरा परिसर ‘बांके बिहारी लाल की जय’ के उद्घोष से गूंज उठा।
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ब्रज में होली का शंखनाद
ब्रज में होली का शंखनाद बज गया है। मथुरा-वृंदावन में आज से ही होली का 40 दिवसीय महोत्सव शुरू हो चुका है। इस अवसर पर वृंदावन के प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर में सुबह से ही भक्तों ने अबीर-गुलाल उड़ाकर होली का रंगीन आरंभ किया।
ब्रज की परंपरा के अनुसार, बसंत पंचमी के दिन ‘होली का ढांडा’ गाड़े जाने के साथ ही होली की शुरुआत मानी जाती है। इस दिन से ब्रज में फागुन के पूरे महीने तक होली की धूम रहती है और मंदिरों में भक्त रंग-रास में लीन हो जाते हैं।
बांके बिहारी मंदिर में विधिवत शुरुआत
वृंदावन के विश्वप्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर में होली का दृश्य बेहद मनमोहक रहा। श्रृंगार आरती के बाद सबसे पहले सेवायत पुजारी ने भगवान बांके बिहारी को गुलाल का टीका लगाया। इसके साथ ही होली का पर्व विधिवत रूप से शुरू हो गया।
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इसके बाद मंदिर प्रांगण में मौजूद श्रद्धालुओं पर सेवायत पुजारियों ने बसंती गुलाल उड़ाया। कुछ ही समय में पूरा माहौल रंगों और उल्लास से भर गया। भक्तों ने एक-दूसरे को गुलाल लगाया और भगवान बांके बिहारी के साथ होली खेलने का आनंद लिया।
भक्तों की अटूट आस्था
मंदिर के सेवायतों ने बताया कि ब्रज की होली प्रेम और भक्ति का प्रतीक है। आज से शुरू हुआ यह सिलसिला अगले 40 दिनों तक यानी पूर्णिमा तक अनवरत चलेगा। श्रद्धालुओं का सैलाब मंदिर के गर्भगृह से लेकर बाहर की गलियों तक देखा जा रहा है, जहां हर कोई गुलाल के रंगों में रंगा हुआ नजर आ रहा है।
