Shri Premanand Ji Maharaj (Source. Pinterest)
Shri Premanand Ji Maharaj Ne Bataya Dharam Ka Rasta: हिंदू धर्म में सेवा, दान और भक्ति को सर्वोच्च स्थान दिया गया है, लेकिन अगर यही सेवा श्रीधाम वृंदावन में की जाए तो उसका फल सामान्य से कहीं अधिक हो जाता है। श्री प्रेमानंद जी महाराज के अनुसार, वृंदावन वह पावन धाम है जहां किया गया प्रत्येक सत्कर्म “करोड़ गुना” फल देने वाला बन जाता है। खासतौर पर यदि कोई व्यक्ति भगवान के प्रेमी, त्यागी और साधना में लीन संतों की सेवा करता है, तो उसे अनंत पुण्य और भगवत कृपा प्राप्त होती है।
श्रीधाम वृंदावन में रहने वाले वे भक्त, जिन्होंने अपना संपूर्ण जीवन भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित कर दिया है, उनकी सेवा करना सामान्य दान नहीं माना जाता। चाहे जल देना हो, भोजन कराना हो, वस्त्र या आश्रय प्रदान करना हो ऐसी सेवा का आध्यात्मिक प्रभाव मानव बुद्धि से परे बताया गया है। शास्त्रों के अनुसार, यहां की गई सेवा का फल अन्य स्थानों की तुलना में करोड़ों गुना बढ़ जाता है।
श्री प्रेमानंद जी महाराज बताते हैं कि दान का फल आपके भाव पर निर्भर करता है।
महाराज जी सावधान करते हैं कि दान करते समय विवेक अत्यंत आवश्यक है।
वे संत जो कुछ नहीं चाहते, केवल श्रीकृष्ण प्रेम में रमे रहते हैं, उन्हें ‘निश्किंचन’ कहा गया है। ऐसे भक्तों की थोड़ी सी सेवा से भी भगवान स्वयं कृतज्ञ हो जाते हैं। भले ही आप वृंदावन में निवास न कर पाएं, लेकिन वहां के विरक्त साधुओं की सेवा करके आप वहां रहने के समान पुण्य प्राप्त कर सकते हैं।
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महाराज जी एक प्रसंग बताते हैं कि जब भगवान अत्यंत कृपा करते हैं, तो वे संसार के मोह को काट देते हैं। जैसे कहा गया है: “जिस पर मैं कृपा करता हूं, उससे पहले उसका धन और आसक्ति छीन लेता हूं।” यह जीवन का नाश नहीं, बल्कि अहंकार, काम और क्रोध का नाश है, जो अंततः सच्चिदानंद की ओर ले जाता है।
अंत में श्री प्रेमानंद जी महाराज कहते हैं कि सेवा के साथ-साथ सबसे बड़ा साधन है हर श्वास के साथ “राधा राधा” का स्मरण। एक क्षण भी नाम से खाली न जाने दें, यही सबसे बड़ी सेवा है।