यह है वाल्मीकि जयंती की सही तिथि, जानिए वाल्मीकि समुदाय के लिए क्यों है इस दिन का महत्व
Valmiki Jayanti 2025: आश्विन मास की पूर्णिमा तिथि को महर्षि वाल्मीकि जयंती का पर्व मनाया जाता है। इस साल यह शुभ तिथि दो दिनों के संयोग में पड़ रही है। जिसके वजह से यह जयंती 7 अक्टूबर 2025 को है।
- Written By: सीमा कुमारी
कब है वाल्मीकि जयंती (सौ.सोशल मीडिया)
Valmiki Jayanti 2025 Kab Hai: आश्विन माह की पूर्णिमा बहुत ही पावन और विशेष मानी जाती है। इस दिन भगवान राम की सबसे प्रमाणिक जीवनगाथा को लिखने वाले महर्षि वाल्मीकि की जयंती भी मनाई जाती है। इस साल यह जयंती 7 अक्टूबर 2025 को पड़ने जा रही है।
महर्षि वाल्मीकि, जिन्हें आदि कवि या फिर कहें संस्कृत भाषा का पहला कवि भी माना जाता है, उनके द्वारा रचित महाकाव्य रामायण को सबसे प्रामाणिक माना जाता है।
आपको बता दें, महर्षि वाल्मीकि के द्वारा रचित रामायण को वाल्मीकि रामायण के रूप में लोग जानते हैं। धार्मिक ग्रंथों में महर्षि वाल्मीकि के जीवन और ज्ञान से जुड़ी कई प्रेरणादायक बातें बताई गई हैं। ऐसे में आइए जान लेते हैं कि महर्षि वाल्मीकि जयंती साल 2025 में कब मनाई जाएगी।
सम्बंधित ख़बरें
Ashadha Amavasya 2026: आषाढ़ अमावस्या पर इन 5 गुप्त दानों से बदल सकती है किस्मत! पितरों का मिलेगा आशीर्वाद
Sawan 2026: सावन में इन 4 चमत्कारी पौधों की पूजा खोल सकती है किस्मत के बंद दरवाजे
Kark Sankranti 2026: 16 जुलाई को खुलेंगे पुण्य के दुर्लभ द्वार! इस खास समय में किया गया एक काम बदल सकता है भाग
सोमवार को शिवलिंग पर चढ़ा दें ये 8 पवित्र चीजें… कहते हैं महादेव जल्दी सुन लेते हैं सच्चे भक्त की पुकार
कब है वाल्मीकि जयंती
आपको बता दें, हिंदू पंचांग के मुताबिक, आश्विन मास की पूर्णिमा तिथि 6 अक्टूबर, सोमवार को दोपहर 12 बजकर 24 मिनट पर शुरू हो रही है। इस तिथि का समापन 7 अक्टूबर, मंगलवार की सुबह 9 बजकर 17 मिनट पर हो रहा है।
दो दिनों का बन रहा योग
ज्योतिष-शास्त्र के अनुसार, इस बार पूर्णिमा का योग दो दिनों तक रहने वाला है। क्योंकि आज की रात पूर्णिमा रहेगी, इसलिए व्रत आज ही रखा जा रहा है। वहीं, महर्षि वाल्मीकि जयंती का उत्सव कल मनाया जाएगा।
कैसे मनाएं महर्षि वाल्मीकि की जयंती
वाल्मीकि जयंती के दिन प्रात:काल सूर्योदय से पहले उठें और स्नान-ध्यान करके अपने पूजा घर को साफ करके वहां पर महर्षि वाल्मीकि का चित्र या मूर्ति स्थापित करें। इसके बाद उनका धूप, दीप, पुष्प, आदि के माध्यम से उनकी पूजा करें।
पूजन के पश्चात वाल्मीकि रामायण का पाठ करें। देश में महर्षि वाल्मीकि के प्राकट्य वाले दिन झांकियां और शोभा यात्राएं भी निकाल करके उनके प्रति श्रद्धा प्रकट की जाती है। वाल्मीकि जयंती के दिन जरूरतमंद लोगों को अन्न-धन और वस्त्र का दान और समाज सेवा करना चाहिए।
वाल्मीकि समुदाय में भगवान के अवतार
आपको बता दें, वाल्मीकि जयंती पूरे देश में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई जाती है। परंतु वाल्मीकि समुदाय के लिए यह दिन विशेष महत्व रखता है। इस समुदाय के लोग महर्षि वाल्मीकि को भगवान का अवतार मानते हैं।
ये भी पढ़ें–पूजा का नारियल अगर खराब निकल जाए तो क्यों है खुशी की बात, अच्छा निकले तो क्या करना चाहिए
वाल्मीकि जयंती के अवसर पर वाल्मीकि मंदिरों और आश्रमों को फूलों से सजाया जाता है। भक्तजन रामायण की चौपाइयों का पाठ करते हैं। महर्षि वाल्मीकि की शिक्षाओं और आदर्शों का स्मरण करते हैं।
