नवरात्रि में विधिवत ‘दुर्गा सप्तशती पाठ’ करने की है अपार महिमा, जानिए क्या हैं इसके नियम
Durga Saptshati: शारदीय नवरात्रि के दौरान दुर्गा सप्तशती पाठ का विशेष महत्व हैं। इसे श्रद्धा और सही विधि से करने पर मां दुर्गा शीघ्र प्रसन्न होती हैं और भक्तों पर अपनी कृपा बरसाती हैं।
- Written By: सीमा कुमारी
ऐसे करें दुर्गा सप्तशती का पाठ (सौ.सोशल मीडिया)
Durga Saptshati Path Ke Niyam: शारदीय नवरात्रि की शुरुआत होते ही पूरा देश मां भगवती की आराधना में सराबोर हो गए हैं। हर तरफ मां के जयकारे के साथ मां दुर्गा की पूजा-अर्चना की जा रही हैं। इस पवित्र पर्व पर लोग मां के विभिन्न रूपों की पूजा करते हैं और शक्ति व विजय की कामना करते हैं। ऐसी मान्यता है कि, मां दुर्गा के इन दिनों में जो भक्त सच्ची श्रद्धा के साथ मां की आराधना करते हैं मां दुर्गा उनकी झोली खुशियों से भर देती हैं।
ज्योतिषियों के अनुसार, नवरात्रि के पावन अवसर पर माता रानी के भक्त दुर्गा सप्तशती पाठ भी करते है। क्योंकि नवरात्रि के शुभ अवसर पर दुर्गा सप्तशती पाठ करना बड़ा शुभ होता है। नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती पाठ करना सिर्फ पूजा-पाठ नहीं बल्कि आत्मशुद्धि और साधना का मार्ग है।
इसे सही विधि से करने पर मानसिक शांति मिलती है। अगर आप जानना चाहते हैं कि किस तरह से दुर्गा सप्तशती का पाठ करना चाहिए, जिससे देवी मां की कृपा आप पर बरसे, तो यहां हम आपको इसके बारे में जानकारी देने जा रहे हैं। जानिए नवरात्रि में नौ दिनों तक दुर्गा सप्तशती पाठ करने की विधि, नियम और इसका आध्यात्मिक महत्व क्या है।
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ऐसे करें दुर्गा सप्तशती का पाठ
ज्योतिषयों के अनुसार, दुर्गा सप्तशती पाठ सुबह या संध्या समय कर सकते हैं। पाठ शुरू करने से पहले संकल्प लें और मां दुर्गा के स्वरूप का ध्यान करें। लाल वस्त्र पर पुस्तक रखकर पूजा करें और फिर अध्यायों का क्रमवार पाठ करें। हर दिन मां के अलग-अलग रूप की पूजा की जाती है और उसी के अनुसार अध्याय पढ़े जाते हैं।
जानिए क्या हैं दुर्गा सप्तशती पाठ के नियम
- आपको बता दें, दुर्गा सप्तशती पाठ शुरू करने से पहले हाथ जोड़कर मां दुर्गा को प्रणाम करें और फिर देवी का ध्यान करें, फिर पाठ पढ़ना शुरू करें।
- दुर्गा सप्तशती पाठ की पुस्तक को हमेशा लाल कपड़े से ढकी चौकी पर रखें, हाथ में सप्तशती की पुस्तक लेकर पाठ करने से अधूरा फल मिलता है।
- पाठ के बीच में बाधा न डालें। अगर पाठ पूरा होने से पहले किसी वजह से रुकना पड़े तो चतुर्थ अध्याय पूरा करने के बाद ही विराम लें।
- दुर्गा सप्तशती का पाठ करते समय उच्चारण स्पष्ट और लयबद्ध होना चाहिए, न बहुत तेज और न बहुत धीमा।
- दुर्गा सप्तशती पाठ से पहले लाल या कुश के आसन पर बैठें।
- शुरुआत में पुस्तक को प्रणाम करें और माता रानी का ध्यान करें।
- दुर्गा सप्तशती पाठ के बाद माता से क्षमा याचना करके पाठ को अर्पित करें।
- नवरात्रि के दौरान मांस, मदिरा, लहसुन-प्याज और तामसिक भोजन से दूर रहें।
- दुर्गा सप्तशती पाठ करते समय किसी के प्रति बुरे भाव न रखें।
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जानिए दुर्गा सप्तशती पाठ का आध्यात्मिक महत्व
हिन्दू धर्म में दुर्गा सप्तशती पाठ का आध्यात्मिक महत्व है। दुर्गा सप्तशती, जिसे चंडी पाठ भी कहा जाता है, मार्कण्डेय पुराण से लिया गया है। इसमें मां के तीन स्वरूपों महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती की महिमा और राक्षस वध की कथाएं वर्णित हैं। जो लोग अक्सर संघर्ष, रोग, आर्थिक समस्या आदि परेशानियों का सामना कर रहे हैं, उनके लिए यह पाठ बेहद लाभकारी बताया गया है।
