Ram And Hanuman (Source. Pinterest)
Ram Ki Samadhi Ke Baad Kaha Gaye Hanuman: धर्मग्रंथों के अनुसार भगवान श्रीराम के प्रति जैसी निष्कलंक और अटूट भक्ति हनुमान जी में थी, वैसी किसी और में दुर्लभ मानी जाती है। हनुमान जी का श्रीराम से ऐसा आत्मिक संबंध था कि वे क्षणभर भी उनसे दूर नहीं रह पाते थे। यही कारण है कि भक्तों के मन में यह प्रश्न आज भी कौतूहल जगाता है कि जब भगवान श्रीराम ने सरयू नदी में जल समाधि ली, तब उनके प्रिय भक्त हनुमान जी कहां थे और उन्होंने प्रभु के साथ समाधि क्यों नहीं ली? इस रहस्यमयी कथा के पीछे गहरा आध्यात्मिक अर्थ छिपा है।
भगवान श्रीराम स्वयं भगवान विष्णु के अवतार थे, जिन्होंने धरती पर सत्य, मर्यादा और धर्म की स्थापना के लिए जन्म लिया। अपने जीवनकाल में उन्होंने अधर्म का नाश किया और धर्म का संरक्षण किया। चौदह वर्षों के वनवास के दौरान भी श्रीराम ने जंगलों में उत्पात मचाने वाले राक्षसों का संहार किया और लंकापति रावण का वध कर माता सीता को मुक्त कराया। इसी काल में उनकी भेंट अपने परम भक्त हनुमान जी से हुई।
वनवास समाप्त होने के बाद श्रीराम अयोध्या लौटे और लंबे समय तक आदर्श राजा के रूप में शासन किया। किंतु जब उन्हें यह अनुभव हुआ कि पृथ्वी पर उनका दायित्व पूर्ण हो चुका है, तो प्रकृति के नियमों का पालन करते हुए उन्होंने मानव शरीर त्यागने का निर्णय लिया। इसके लिए वे सरयू नदी के तट पर पहुंचे और जल समाधि लेकर वैकुंठ धाम को प्रस्थान किया।
यहां सबसे बड़ा प्रश्न उठता है कि श्रीराम की जल समाधि के समय हनुमान जी कहां थे। कुछ धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, भगवान श्रीराम जानते थे कि यदि हनुमान जी को उनके निर्णय का पता चल गया, तो वे उन्हें ऐसा करने नहीं देंगे और स्वयं भी उनके साथ समाधि ले लेंगे। जबकि श्रीराम चाहते थे कि हनुमान जी धरती पर रहकर भक्ति और धर्म का मार्गदर्शन करते रहें।
इसी कारण श्रीराम ने एक उपाय किया। उन्होंने हनुमान जी से कहा कि महल के फर्श की दरार में उनकी अंगूठी गिर गई है, उसे ढूंढ लाएं। प्रभु की आज्ञा मानकर हनुमान जी अंगूठी खोजते-खोजते नागलोक तक पहुंच गए। वहां उन्होंने नागराज वासुकी को अपने आने का कारण बताया।
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नागराज वासुकी ने हनुमान जी को असंख्य अंगूठियां दिखाईं, जिनमें से हर दूसरी अंगूठी पर “श्रीराम” अंकित था। यह दृश्य देखकर हनुमान जी समझ गए कि यह सब प्रभु की लीला थी। यह जानकर वे अत्यंत व्यथित हो गए। तब वासुकी ने उन्हें समझाया कि भगवान श्रीराम संसार त्यागकर वैकुंठ जा चुके होंगे। यह कथा बताती है कि हनुमान जी आज भी पृथ्वी पर राम नाम का प्रचार कर रहे हैं और उनकी भक्ति कालातीत है।