नवंबर का पहला प्रदोष सोमवार को, जानिए ‘सोम प्रदोष’ पूजा का शुभ मुहूर्त और महिमा
Pradosh Vrat kab hai : प्रदोष व्रत हर में शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को किया जाता है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से व्यक्ति को भगवान शिव की आसीम कृपा प्राप्त होती है।
- Written By: सीमा कुमारी
कब है सोम प्रदोष व्रत (सौ.सोशल मीडिया)
Pradosh Vrat 2025 date: देवों के देव महादेव को समर्पित प्रदोष व्रत हर महीने दो बार, कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर मनाया जाता है। इस बार कार्तिक महीने की प्रदोष व्रत 3 नवंबर 2025, सोमवार को मनाई जाएगी। यह व्रत भगवान शिव की कृपा पाने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है और इसे त्रयोदशी व्रत भी कहते हैं।
शास्त्रों के अनुसार, इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना करने से हर तरह के दोष दूर होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
कहा जाता है कि, जब यह तिथि सोमवार के दिन पड़ती है, तब इसे सोम प्रदोष व्रत कहा जाता है। आपको बता दें, नवंबर महीने का पहला सोम प्रदोष व्रत इस बार 3 नवंबर 2025, सोमवार को पड़ रहा है। ऐसे में आइए जानते हैं इस दिन का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और धार्मिक महत्व के बारे में-
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कब है सोम प्रदोष व्रत
सोम प्रदोष व्रत तिथि: 3 नवंबर 2025, सोमवार
कार्तिक शुक्ल त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: 03 नवंबर 2025, सुबह 5 बजकर 7 मिनट पर
कार्तिक शुक्ल त्रयोदशी तिथि समाप्त: 04 नवंबर 2025, रात 02 बजकर 5 मिनट पर
चूंकि प्रदोष व्रत की पूजा प्रदोष काल (शाम का समय) में की जाती है और त्रयोदशी तिथि 03 नवंबर को प्रदोष काल में भी रहेगी, इसलिए सोम प्रदोष व्रत 03 नवंबर 2025 को रखा जाएगा।
प्रदोष व्रत शुभ मुहूर्त
प्रदोष व्रत में भगवान शिव की पूजा सूर्यास्त के बाद और रात्रि से पहले की जाती है, जिसे प्रदोष काल कहा जाता है। इस काल में पूजा करना ही सर्वोत्तम फल देता है।
प्रदोष काल पूजा का शुभ मुहूर्त: शाम 5 बजकर 34 मिनट से रात 8 बजकर 11 मिनट तक रहेगा।
कुल अवधि: 2 घंटे 36 मिनट
सोम प्रदोष व्रत का महत्व:
रोग मुक्ति और चंद्र दोष निवारण
सोमवार का दिन भगवान शिव और चंद्र देव दोनों को समर्पित है। सोम प्रदोष व्रत करने से व्यक्ति को चंद्र दोष से मुक्ति मिलती है और सेहत अच्छी बनी रहती है। यह व्रत लंबी आयु और उत्तम स्वास्थ्य की कामना के लिए विशेष फलदायी है।
मनोकामना पूर्ति
कहा जाता है कि, इस दिन सच्चे मन से व्रत और पूजा करने से भगवान शिव और माता पार्वती शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं।
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सुख-शांति और वैवाहिक जीवन खुशहाल
इस व्रत को करने से घर में सुख-शांति आती है और वैवाहिक जीवन में मधुरता बनी रहती है। अविवाहित लड़कियां मनचाहा वर पाने के लिए भी यह व्रत रखती है।
