संकल्प लेना पूजा प्रक्रिया का है अनिवार्य अंग, जानिए कैसे लिया जाता है संकल्प
किसी भी पूजा पाठ को शुरु करने से पहले संकल्प लेने का नियम होता है। कहते हैं पूजा करने से पहले संकल्प लेने से कार्य की सिद्धि होती है। यहां पर पूजा पाठ शुरु करने से पहले संकल्प को प्रक्रिया के तहत लिया जाता है।
- Written By: दीपिका पाल
संकल्प लेने के नियम (सौ.सोशल मीडिया)
Puja Path Niyam: हिंदू धर्म में पूजा-पाठ का महत्व होता है जहां पर इसे लेकर नियम भी होते है इसका पालन करना जरूरी है। किसी भी पूजा पाठ को शुरु करने से पहले संकल्प लेने का नियम होता है। कहते हैं पूजा करने से पहले संकल्प लेने से कार्य की सिद्धि होती है। यहां पर पूजा पाठ शुरु करने से पहले संकल्प को प्रक्रिया के तहत लिया जाता है। कहा यह भी जाता है कि, अगर आप किसी प्रकार का संकल्प धारण नहीं करते है पूजा का फल आपको मिलने के बजाय देवराज इंद्र को मिल जाता है।
क्या होता है संकल्प का अर्थ
यहां पर हिंदू धर्म में संकल्प लेने का अर्थ बताया है इसे लेकर कहा जाता है कि, अपने इष्टदेव या फिर स्वयं को साक्षी मानकर यह संकल्प लेना कि हम जिस मनोकामना के लिए यह पूजा या व्रत करने जा रहे हैं उस पूजन को पूर्ण करें।
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संकल्प और पूजा पाठ का है नाता
आपको बताते चलें, ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास ने पूजा पाठ औऱ व्रत से पहले संकल्प लेने के नियम बताए है जो इस प्रकार है। यहां पर संकल्प लेने की विशेष विधि होती है. इसमें सबसे पहले हाथ में जल, अक्षत और फूल लेकर भगवान गणेश का ध्यान किया जाता है। इसका कारण यह है कि, श्रीगणेश ही सृष्टि के पंचमहाभूतों (अग्नि, पृथ्वी, जल, वायु और आकाश) के अधिपति हैं।
इस प्रकार संकल्प लेकर पूजा करने से पूजा बिना किसी विघ्न के पूर्ण होती है,लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि आपने जिस व्रत या पूजा के लिए संकल्प लिया हो उसे पूरा जरूर करें, संकल्प लेने के बाद व्रत या पूजा को अधूरा न छोड़ें।
संकल्प के बिना पूजा मानी जाती है अधूरी
यहां पर धार्मिक विद्वानों के अनुसार माना जाता है कि, पूजा-पाठ औऱ संकल्प का महत्व होता है इन दोनों को साथ जरूरी है। कहते हैं बिना संकल्प के पूजा सफल नहीं होती है यानि इसके सकरात्मक परिणाम नहीं मिलते है। जो लोग बिना संकल्प के पूजा या व्रत करते हैं उनके पूजा का पूरा फल देवराज इंद्र को प्राप्त हो जाता है। यहां पर किसी धार्मिक अनुष्ठान को शुरु करने से पहले संकल्प जरूर लें।
