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आज स्कंदमाता पूजा में जरूर पढ़ें ये पौराणिक कथा, भर जाएगी सूनी गोद और मिलेगा सुख और समृद्धि का वरदान

Vrat Katha: नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा के साथ उनकी पौराणिक कथा पढ़ना अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे निःसंतान दंपत्तियों को संतान सुख की प्राप्ति होती है।

  • Written By: सीमा कुमारी
Updated On: Mar 23, 2026 | 08:31 AM

मां स्कंदमाता (सौ. Gemini)

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Skandamata Katha In Hindi: चैत्र नवरात्रि का पांचवां दिन आदिशक्ति मां भवानी के दिव्य स्वरूप मां स्कंदमाता की पूजा के लिए समर्पित माना जाता है। नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की आराधना का विशेष महत्व होता है और प्रत्येक दिन का अपना अलग आध्यात्मिक अर्थ और फल माना जाता है।

इन नौ स्वरूपों में पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा विशेष रूप से की जाती है, जो मातृत्व, करुणा और शक्ति का प्रतीक हैं।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, माता की पूजा के समय व्रत कथा का पाठ जरुर करना चाहिए। व्रत कथा का पाठ करने से मां प्रसन्न होकर जीवन को खुशियों से भर देती हैं। ऐसे में आज माता की पूजा के समय व्रत कथा का पाठ अवश्य करें। आइए जानते हैं मां स्कंदमाता की कथा-

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स्कंदमाता की पूजा समय अवश्य पढ़ें ये कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, तारकासुर नाम का एक शक्तिशाली असुर था। उसने कठोर तपस्या कर भगवान ब्रह्मा को प्रसन्न किया। वरदान स्वरूप उसे यह प्राप्त हुआ कि उसकी मृत्यु केवल भगवान शिव के पुत्र के हाथों ही संभव होगी। उस समय भगवान शिव गहन तपस्या में लीन थे और माता सती का पुनर्जन्म नहीं हुआ था, इसलिए तारकासुर को विश्वास हो गया कि वह लगभग अमर है।

वरदान के अहंकार में आकर तारकासुर ने देवताओं और मनुष्यों पर अत्याचार करना शुरू कर दिया। उसके अत्याचारों से परेशान होकर सभी देवता भगवान शिव के पास पहुंचे और उन्हें तपस्या से जगाने का प्रयास किया। इसी बीच माता सती ने हिमालयराज के घर पार्वती के रूप में जन्म लिया और उन्होंने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तप किया।

देवताओं के प्रयास और माता पार्वती की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उनसे विवाह किया। इसके बाद उनके पुत्र भगवान कार्तिकेय (स्कंद) का जन्म हुआ। माता पार्वती ने स्वयं अपने पुत्र स्कंद को युद्ध कौशल की शिक्षा दी।

यह भी पढ़ें:लक्ष्मी पंचमी 2026: आज करें लक्ष्मी चालीसा का पाठ, घर में आएगी धन-धान्य और समृद्धि

 बाद में भगवान कार्तिकेय ने तारकासुर का वध कर देवताओं को उसके आतंक से मुक्त कराया। मान्यता है कि मां स्कंदमाता की श्रद्धा और भक्ति से पूजा करने पर संतान से जुड़ी समस्याएं दूर होती हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।

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Published On: Mar 23, 2026 | 08:31 AM

Topics:  

  • Chaitra Navratri
  • Goddess Durga
  • Goddess Lakshmi
  • Navratri
  • Religion News

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