किस दिन रखा जाएगा साल 2025 की अंतिम स्कंद षष्ठी व्रत, नोट कर लें सही डेट और शुभ मुहूर्त
Skanda Shashti Rules And Rituals: शिव गौरी पुत्र भगवान कार्तिकेय को समर्पित स्कंद षष्ठी का पावन पर्व कल मनाया जाएगा। यह दिन कार्तिकेय की उपासना और शक्ति-साधना का विशेष दिन है।
- Written By: सीमा कुमारी
स्कंद षष्ठी व्रत (सौ.सोशल मीडिया)
Skanda Shashti Significance:’स्कंद षष्ठी’ दक्षिण भारत के प्रमुख त्योहारों में से एक है। जो हर महीने शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को स्कंद षष्ठी मनाई जाती है। यह व्रत शिव गौरी पुत्र भगवान कार्तिकेय को समर्पित है। मान्यता है कि इस दिन व्रत और विधिपूर्वक पूजा करने से शत्रुओं पर विजय, रोगों से मुक्ति और जीवन में सफलता प्राप्त होती है।
इस बार पौष मास की स्कंद षष्ठी का व्रत 25 दिसंबर को मनाया जा रहा है। ऐसे में आइए जानते है स्कंद षष्ठी व्रत से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें
स्कंद षष्ठी 2025: तिथि और शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार पौष माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि
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षष्ठी तिथि प्रारंभ: 25 दिसंबर को दोपहर बाद
षष्ठी तिथि समाप्त: 26 दिसंबर को दोपहर बाद
उदयातिथि के अनुसार स्कंद षष्ठी व्रत 26 दिसंबर को रखा जाएगा। हालांकि कुछ स्थानों पर परंपरा अनुसार तिथि आरंभ होने के कारण 25 दिसंबर को भी व्रत किया जाता है, लेकिन शास्त्रसम्मत रूप से 26 दिसंबर को व्रत रखना अधिक उचित माना गया है।
स्कंद षष्ठी व्रत का शुभ मुहूर्त
प्रातः पूजा का श्रेष्ठ समय: सूर्योदय के बाद
अभिषेक और आरती: सुबह से दोपहर तक
व्रत पारण: अगले दिन सूर्योदय के बाद
स्कंद षष्ठी व्रत का धार्मिक महत्व
स्कंद षष्ठी का संबंध तारकासुर वध से जुड़ा है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान कार्तिकेय ने असुरों पर विजय प्राप्त की थी। इस व्रत को करने से—
- शत्रुओं से रक्षा होती है
- संतान सुख की प्राप्ति होती है
- साहस, आत्मविश्वास और पराक्रम बढ़ता है
- रोग, भय और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है
- दक्षिण भारत में यह व्रत विशेष रूप से श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।
स्कंद षष्ठी व्रत की पूजा विधि
- प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें
- भगवान कार्तिकेय की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें
- गंगाजल से अभिषेक करें
- पीले फूल, फल, धूप-दीप अर्पित करें
- “ॐ स्कंदाय नमः” मंत्र का जाप करें
- स्कंद षष्ठी कथा का पाठ करें
- अंत में आरती करें
ये है स्कंद षष्ठी व्रत के नियम
- दिनभर सात्विक आहार या फलाहार करें
- क्रोध, झूठ और नकारात्मक विचारों से बचें
- ब्रह्मचर्य और संयम का पालन करें
- व्रत के दिन तामसिक भोजन न करें
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स्कंद षष्ठी व्रत से मिलने वाले लाभ
- करियर और व्यापार में सफलता
- पारिवारिक सुख-शांति
- मानसिक बल और आत्मविश्वास
- शत्रु बाधा से मुक्ति
