

शुक्र प्रदोष व्रत 23 अक्टूबर 2026, शुक्रवार को रखा जाएगा।
शिवजी की पूजा के लिए जल, बेलपत्र, फूल, चंदन, अक्षत और दीपक रखें।
पूजा सामग्री का इस्तेमाल कैसे करें और प्रदोष काल में किस विधि से करें शिव आराधना, जानें।
Shukra Pradosh Vrat: शुक्र प्रदोष व्रत 23 अक्टूबर 2026 को रखा जाएगा। आश्विन शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 23 अक्टूबर को दोपहर करीब 2:35 बजे शुरू होकर 24 अक्टूबर को दोपहर करीब 1:36 बजे तक रहेगी।
प्रदोष काल शाम लगभग 5:55 बजे से शुरू होगा। शुक्रवार को पड़ने के कारण इसे शुक्र प्रदोष व्रत कहा जाता है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है।
शुक्र प्रदोष पर पूजा की तैयारी पहले से कर लेने से शाम के समय सामग्री जुटाने की भागदौड़ नहीं रहती। पूजा में इस्तेमाल होने वाली चीजें परिवार और क्षेत्र की परंपरा के अनुसार अलग हो सकती हैं। सामान्य तौर पर थाली में जरूर शामिल करें ये 6 चीजें।
शिवलिंग पर जल चढ़ाकर पूजा शुरू की जाती है। जल में थोड़ा गंगाजल मिलाकर भगवान शिव का अभिषेक करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि आती है और भोले नाथ की पूजा पूर्ण मानी जाती है।
शिवलिंग का दूध से अभिषेक किया जाता है। इसके लिए दूध, दही धी, शक्कर और शहद को मिलाकर पंचामृत बनाई जाती है और फिर इसी से भोलेनाथ का अभिषेक किया जाता है, जब कि कई जगहों पर एक-एक सामग्री से अलग से अभिषेक किया जाता है। अंत में स्वच्छ जल से शिवलिंग का अभिषेक कर आगे की पूजा की जाती है।
भगवान शिव की पूजा में बेलपत्र चढ़ाने का विशेष महत्व है। इसके लिए साफ और साबुत पत्ते चुनें। तीन पत्तों वाली बेलपत्र भगवान शिव को उल्ट कर चढ़ाई जाती है। कहा जाता है कि यह शिव जी को अति प्रिय है और इससे घर में सुख-शांति का वास होता है।
पूजा में ताजे फूल और चंदन को भी शामिल किया जाना चाहिए। शिवलिंग पर चंदन का तिलक लगाने से मन शांत और एकाग्र होता है। पूजा में पुष्प चढ़ाने से पूजा स्थल भक्तिमय हो जाता है।
पूजा की थाली में साबुत चावल यानी अक्षत, धूपबत्ती और घी या तेल का दीपक रखें। दीपक जलाकर भगवान शिव का ध्यान करें और मंत्र जपें और पूजा के अंत में भगवान शिव की आरती के साथ पूजा का समापन करें।
भगवान शिव को मौसमी फल, मिश्री या घर में बना प्रसाद अर्पित कर सकते हैं। धतूरा, भांग और सफेद आक जैसे चीजें भगवान शिव को अतिप्रिय है।
प्रदोष काल में स्नान करके साफ कपड़े पहनें और भगवान शिव-पार्वती के सामने व्रत का संकल्प लें। शिवलिंग पर जल चढ़ाएं, फिर बेलपत्र, फूल और चंदन अर्पित करें। ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करें और प्रदोष व्रत की कथा सुनें या पढ़ें। अंत में आरती करके प्रसाद बांटें।
शुक्र प्रदोष में शिव-पार्वती की पूजा से घर में सुख-शांति और दांपत्य जीवन में सौहार्द की वृद्धि होती है। पूजा में सामग्री से अधिक श्रद्धा और नियमपूर्वक की गई आराधना को महत्व दिया जाता है।