

Pradosh Vrat: भगवान शिव की आराधना का पावन व्रत प्रदोष व्रत हर महीने के कृष्ण व शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी को रखा जाता है। इस बार चैत्र महीने यानी हिंदू नववर्ष का पहला प्रदोष व्रत 10 अप्रैल,गुरुवार के दिन रखा जा रहा है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्रदोष व्रत और शिव पूजा करने से व्यक्ति के सभी प्रकार के रोग और दोष समाप्त हो जाते हैं इसलिए हिन्दू धर्म में इस व्रत का बड़ा महत्व है।
इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती के साथ ही बेलपत्र पेड़ की पूजा करने से भी शुभ फलों की प्राप्ति होती है। कहा जाता है कि ऐसा करने से भक्तों पर सदैव शिव कृपा बनी रहती है। ऐसे में आइए जानते है प्रदोष व्रत के दिन बेलपत्र पेड़ की पूजा का महत्व
प्रदोष व्रत के दिन ऐसे करें बेलपत्र पेड़ की पूजा
जानिए क्या है प्रदोष व्रत के दिन बेलपत्र पूजा का महत्व
प्रदोष व्रत के दिन बेलपत्र पूजा का महत्व है। भगवान शिव को बेलपत्र अति प्रिय है। महादेव की पूजा बेलपत्र के बिना अधूरी मानी जाती है। भोलेनाथ को बेलपत्र चढ़ाने से भक्तों को मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्रदोष व्रत के दिन शिवजी के साथ बेलपत्र पेड़ की पूजा अत्यंत फलदायी माना जाता है। अगर किसी की कुंडली में ग्रह दोष हैं तो उसे भी इससे शांति मिलती है और जीवन में आने वाले संकटो से छुटकारा भी मिलता है। इसलिए सनातन धर्म में शिव पूजा का विशेष महत्व है।