सूर्य ग्रहण को अशुभ मानने के पीछे छुपे हैं ये वैज्ञानिक कारण, जानिए हमारे शास्त्रों में भी हैं इसके प्रमाण
Solar Eclipse Significance: सूर्य ग्रहण को अशुभ मानने के पीछे केवल धार्मिक मान्यताएं ही नहीं, बल्कि कुछ वैज्ञानिक कारण भी जुड़े हैं। जानिए शास्त्रों में क्या उल्लेख मिलता है।
- Written By: सीमा कुमारी
सूर्य ग्रहण (सौ.सोशल मीडिया)
Surya Grahan Kyon Ashubh Mana Jata Hai : आज 17 फरवरी 2026 को साल का पहला सूर्य ग्रहण लग रहा है। भले ही सूर्य ग्रहण को एक खगोलीय घटना बताया जाता है। लेकिन, इसे हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक और पौराणिक दृष्टि से भी देखा जाता है। आस्था और ज्योतिष के नजरिए से यह एक बहुत ही प्रभावशाली समय होता है।
अक्सर ग्रहण का नाम आते ही घर के बड़े-बुजुर्ग और पंडित हमें सावधान रहने की सलाह देने लगते हैं। ऐसे में आइए जानते हैं सूर्य ग्रहण क्यों माना जाता है अशुभ समय?
सूर्य ग्रहण क्यों माना जाता है अशुभ समय?
सूर्य ग्रहण को भारतीय परंपरा में एक विशेष और संवेदनशील समय माना गया है। यद्यपि यह एक खगोलीय घटना है, लेकिन धार्मिक ग्रंथों और शास्त्रों में इसके कई आध्यात्मिक अर्थ बताए गए हैं।
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राहु-केतु की कथा
पौराणिक मान्यता के अनुसार, समुद्र मंथन के समय असुर राहु ने देवताओं के बीच अमृत पी लिया था। जब भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से उसका सिर धड़ से अलग किया, तब से राहु और केतु सूर्य और चंद्रमा को ग्रसते हैं। इसी घटना को ग्रहण से जोड़ा जाता है।
नकारात्मक ऊर्जा का समय
शास्त्रों में कहा गया है कि ग्रहण काल में वातावरण में सूक्ष्म नकारात्मक ऊर्जा बढ़ जाती है। इसलिए इस दौरान शुभ कार्य, पूजा-पाठ या नए कार्यों की शुरुआत से बचने की सलाह दी जाती है।
सूतक काल का महत्व
- ग्रहण से कुछ समय पहले सूतक काल शुरू माना जाता है।
- सूतक काल को पवित्र नहीं माना जाता, इसलिए इस दौरान कुछ कार्यों को करने की मनाही होती है।
- शास्त्रों के अनुसार, सूतक लगने के बाद भगवान की मूर्तियों को छूना और उनकी पूजा करना वर्जित है।
- इसके अलावा, इस दौरान भोजन पकाने और उसे खाने से भी बचना चाहिए, क्योंकि सूर्य की शक्ति कम होने से हमारे पाचन तंत्र पर बुरा असर पड़ने की आशंका रहती है।
- सूतक के समय सोने, नाखून काटने या कैंची-चाकू जैसी नुकीली चीजों का उपयोग करने से बचना चाहिए।
- खासतौर से गर्भवती महिलाओं को इस दौरान अधिक सावधानी बरतने और घर के अंदर ही रहने की प्यार भरी सलाह दी जाती है।
- इस अवधि में भोजन न करने, मंदिर के कपाट बंद रखने और मंत्र-जप करने की परंपरा है।
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वैज्ञानिक दृष्टिकोण
विज्ञान के अनुसार सूर्य ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच आ जाता है। इसका धार्मिक अशुभता से सीधा संबंध सिद्ध नहीं है, लेकिन परंपराओं में सावधानी और आत्मचिंतन का महत्व बताया गया है। सूर्य ग्रहण को अशुभ से अधिक एक सावधानी और आध्यात्मिक जागरूकता का समय माना गया है।
