

Bhagwan Bholenath Ki Kripa: हिन्दू धर्म में सावन का महीना भगवान शिव की आराधना, जलाभिषेक और श्रावण सोमवार व्रतों के लिए समर्पित सबसे पवित्र और महत्वपूर्ण समय बताया जाता है। इस पवित्र महीने में श्रद्धालु भगवान शिव की उपासना करते हैं और व्रत रखते हैं।
वैसे तो ज्यादातर श्रद्धालु सिर्फ सावन सोमवार के ही व्रत रहते हैं, लेकिन कुछ भक्त ऐसे भी हैं जो इस महीने के पूरे 30 दिन व्रत रहते हैं। कहते हैं जो भी व्यक्ति पूरे सावन माह व्रत रहकर भगवान शिव की विधि विधान पूजा करता है उसके जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। आइए जानते हैं इस कठोर व्रत को रखने के नियम क्या हैं।
हिंदू मान्यता के अनुसार सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित है। ऐसे में इस पावन मास का पुण्यफल पाने के लिए व्यक्ति को प्रतिदिन शिवलिंग का जलाभिषेक करना चाहिए।
धर्म शास्त्रों में बताया गया है कि, सावन महीने में भगवान शिव की साधना-आराधना करने वाले श्रद्धालुओं को पूरी तरह से ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए।
कहा जाता है कि, सावन के महीने में सिर्फ भगवान शिव ही नहीं बल्कि पूरे शिव परिवार यानि भगवान श्री गणेश, भगवान कार्तिकेय, माता पार्वती और शिव के प्रिय गण नंदी की पूजा भी करनी चाहिए।
हिंदू मान्यता के अनुसार, किसी भी देवी या देवता को शीघ्र ही प्रसन्न करने के लिए व्रत और उपवास को सर्वोत्तम उपाय होता है। अगर आप शिव कृपा चाहते है तो विशेष रूप से सावन सोमवार का व्रत जरुर रखें।
भगवान शिव को हमेशा तांबे के लोटे से जल अर्पित करें। शिव को समर्पित श्रावण मास में देवों के देव महादेव की पूजा करते समय कभी भूलकर भी हल्दी का प्रयोग न करें।
श्रावण मास में शिव साधना करने वाले साधक को अपनी दाढ़ी और बाल नहीं कटवाना चाहिए। मान्यता है कि श्रावण मास में बाल को कटवाने से व्रत और तप खंडित होता है।
शास्त्रों के अनुसार श्रावण मास में हरे पत्तेदार सब्जी, बैंगन, दूध, मांस-मदिरा आदि का सेवन करने से बचना चाहिए।