संत रविदास (सौ.सोशल मीडिया)
Sant Ravidas Jayanti Kab Hai 2026: संत रविदास जयंती हर साल माघ पूर्णिमा के दिन मनाई जाती है। इस साल यह जयंती 1 फरवरी 2026, रविवार के दिन मनाई जाएगी। माघ पूर्णिमा को रविदास जयंती इसलिए मनाई जाती है क्योंकि संत रविदास जी का जन्म माघ मास की पूर्णिमा के दिन हुआ था। यह दिन उनके अनुयायियों के लिए अत्यंत पावन और प्रेरणादायक होता है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, संत रविदास एक महान भक्ति संत, समाज सुधारक और कवि थे, जिन्होंने जातिवाद और सामाजिक भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाई। उनके द्वारा दिया गया प्रेम, एकता और भक्ति का संदेश आज भी लोगों को प्रेरित करता है।
संत रविदास का जीवन और उनकी शिक्षाएं हमें समाज में समानता, प्रेम, भक्ति और सादगी का महत्व सिखाती हैं। उनके दोहे आज भी प्रासंगिक हैं और मानवता को सही दिशा दिखाते हैं। संत रविदास जयंती पर हमें उनके संदेशों को आत्मसात कर समाज में सद्भाव और भाईचारे को बढ़ावा देना चाहिए।
संत रविदास जी का जन्म वाराणसी (काशी) में हुआ था। माना जाता है कि वे एक साधारण परिवार से थे और उनका कार्य जूते बनाना (चर्मकार) था। लेकिन उनका जीवन यह सिखाता है कि महानता जन्म या जाति से नहीं, कर्म और विचारों से मिलती है।
बचपन से ही रविदास जी का मन ईश्वर भक्ति और सत्य की खोज में रमा रहता था। वे बाहरी आडंबरों से दूर रहकर भीतर की शुद्धता, प्रेम और समानता पर जोर देते थे।
संत रविदास जी ने समाज में फैली ऊंच-नीच, जाति-पाति और भेदभाव की कुरीतियों का खुलकर विरोध किया। उनके भजन और वाणी में यह स्पष्ट संदेश मिलता है कि—
भक्ति के लिए किसी विशेष जाति या वर्ग की जरूरत नहीं
उनकी वाणी इतनी प्रभावशाली थी कि मीराबाई जैसी महान भक्त भी उनसे प्रभावित हुईं। उनके कई पद गुरु ग्रंथ साहिब में भी शामिल हैं, जो उनकी आध्यात्मिक ऊंचाई को दर्शाता है।
माघ पूर्णिमा स्वयं भी एक पवित्र तिथि मानी जाती है। इस दिन गंगा स्नान, दान और सत्कर्म का विशेष महत्व है। ऐसे पावन दिन पर संत रविदास जी का जन्म होना उनके महान व्यक्तित्व और आध्यात्मिक तेज को और भी विशेष बनाता है।
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इसी कारण माघ पूर्णिमा के दिन रविदास जयंती मनाकर लोग उनके विचारों को याद करते हैं और जीवन में अपनाने का संकल्प लेते हैं।