हरियाली तीज पर ये ना करें (सौजन्य सोशल मीडिया)
सुहागिन महिलाओं के लिए हरियाली तीज का पर्व हिन्दू धर्म में बहुत ही खास महत्व रखता है। माना जाता है कि इस व्रत को करने से महिलाओं को सदा सुहागन होने का वरदान मिलता है और कुंवारी कन्याओं को मनचाहे वर की प्राप्ति होती है। तो अगर आपकी भी हाल-फिलहाल में शादी हुई है और आप पहली बार हरियाली तीज का व्रत रख रही हैं, तो कुछ जरूरी बातों और नियमों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। ऐसे में आइए जान लें क्या हैं ये नियम….
ज्योतिषियों के अनुसार श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया में मनाया जाने वाला हरियाली तीज त्योहार सुहागिन महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखता है। हरियाली तीज भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है। हरा रंग प्रकृति का प्रतीक है। यह जीवन, उर्वरता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। इसलिए हरियाली तीज के दिन नवविवाहित महिलाएं हरे रंग की साड़ी जरूर पहनें।
हरियाली तीज व्रत बिना कुछ खाए-पिए रखा जाता है। रात को चांद की पूजा के बाद ही व्रत खोला जाता है। अगर आप किसी भी वजह से निर्जला व्रत रखने में सक्षम नहीं है, तो फलाहार व्रत का संकल्प लें।
हरियाली तीज के दिन सूर्योदय से पूर्व स्नान के बाद सिंधारे में आए कपड़े पहनें। इस दिन हरी साड़ी या सूट पहनना चाहिए। पूजा से पहले विवाहित महिलाएं सोलह श्रृंगार करें। पूजा से पहले समस्त सामग्री एकत्रित कर लें। पूजा के बीच में उठना अशुभ माना जाता है।
हरियाली तीज का त्यौहार सुहागिन महिलाओं के लिए खास महत्व रखता है। इस दिन महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा पहनकर, मेहंदी लगाकर और पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि और पति की लंबी आयु की कामना करती हैं। नवविवाहिताओं के लिए मेहंदी का विशेष महत्व होता है। यह उनके सुहाग और वैवाहिक जीवन की शुरुआत का प्रतीक है।
इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा नवविवाहित महिलाएं अवश्य करें। इस दिन व्रत कथा पढ़ने का भी विशेष महत्व है। ऐसी मान्यता है कि जो महिलाएं व्रत कथा सुनती व पढ़ती हैं, उन्हें अखंड सौभाग्य का वरदान मिलता है। साथ ही वैवाहिक जीवन भी सुखमय रहता है।
हरियाली तीज व्रत में सुहागिन महिलाएं पूजा के बाद माता रानी को चढ़ाया हुआ सिंदूर मांग में भरें और पति की लंबी आयु की कामना करें। इस दिन स्त्रियां अपनी सास या सास के समान किसी महिला को सुहाग का सामान भेंट करें और आशीर्वाद लें।
हरियाली तीज व्रत का पारण रात में चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही किया जाता है। कई महिलाएं अगले दिन सूर्योदय के बाद शुभ मुहूर्त में व्रत खोलती हैं। ध्यान रहे व्रत पारण में पूजा में भोग लगाया हुआ प्रसाद सबसे पहले ग्रहण किया जाता है, इसके बाद ही भोजन किया जाता है।
लेखिका- सीमा कुमारी