रावण ने खुद राम को दिया था जीत का आशीर्वाद! रामायण की वो कथा जो शायद आपने कभी नहीं सुनी
Ramayan Katha Ki Un Suni Kahani: त्रेता युग में अधर्म के नाश और धर्म की स्थापना के लिए जगत के पालनहार भगवान श्रीहरि विष्णु ने प्रभु श्रीराम के रूप में धरती पर अवतार लिया।
- Written By: सिमरन सिंह
Ram and Ravan (Source. Pinterest)
Shri Ram Aur Ravan Ki Baat: त्रेता युग में अधर्म के नाश और धर्म की स्थापना के लिए जगत के पालनहार भगवान श्रीहरि विष्णु ने प्रभु श्रीराम के रूप में धरती पर अवतार लिया। मर्यादा, सत्य और धर्म के प्रतीक भगवान राम ने लंकापति रावण का वध कर यह सिद्ध किया कि अंततः जीत सदा सत्य और धर्म की ही होती है। यह कथा लगभग हर व्यक्ति जानता है, लेकिन रामायण से जुड़ा एक ऐसा रहस्यमय प्रसंग भी है, जिसे सुनकर आज भी लोग चौंक जाते हैं। क्या आप जानते हैं कि लंका युद्ध से पहले स्वयं रावण ने श्रीराम को विजय का आशीर्वाद दिया था?
पहली बार सुनने में यह बात अविश्वसनीय लगती है, लेकिन “रावण संहिता” में इस प्रसंग का उल्लेख मिलता है। आइए जानते हैं इस अद्भुत और कम चर्चित कथा के बारे में।
युद्ध से पहले यज्ञ कराने का विचार
रावण संहिता के अनुसार, जब भगवान श्रीराम वानर सेना के साथ माता सीता की खोज करते हुए लंका के समीप पहुंचे, तब उन्होंने देवों के देव महादेव की कृपा पाने और विजय सुनिश्चित करने के लिए एक विशेष यज्ञ कराने का संकल्प लिया। यज्ञ को सफल बनाने के लिए एक ऐसे विद्वान पंडित की आवश्यकता थी, जो शिवभक्त हो और वेद-शास्त्रों का ज्ञाता हो।
सम्बंधित ख़बरें
शीतलाष्टमी पर चुपचाप कर लें ये 7 अचूक उपाय, नौकरी, कारोबार और परिवार की बड़ी परेशानियां हो सकती हैं दूर
बेलपत्र नहीं… इस शिव मंदिर में भोलेनाथ को चढ़ता है जिंदा केकड़ा, आखिर क्या है सदियों पुरानी रहस्यमयी परंपरा
Sawan Shivratri 2026: इस दिन खुलेंगे महादेव की कृपा के द्वार, नोट कर लें पूजा और जलाभिषेक का सबसे शुभ समय
Sawan Vrat 2026: सावन में ये 6 व्रत करने वाले पर बरसती है भोलेनाथ की विशेष कृपा, क्या आपने रखा इनमें से कोई
त्रेता युग में रावण से बड़ा शिवभक्त और महाज्ञानी कोई नहीं था। यही कारण था कि श्रीराम ने अपनी विजय के लिए यज्ञ कराने का निमंत्रण स्वयं रावण को भेजा।
शत्रु नहीं, धर्म के मार्ग पर चला रावण
भगवान शिव का परम भक्त होने के कारण रावण ने श्रीराम का निमंत्रण स्वीकार कर लिया। उस समय उसने श्रीराम को शत्रु नहीं, बल्कि एक यज्ञकर्ता के रूप में देखा। रावण ने पूरे विधि-विधान से यज्ञ संपन्न कराया और अपने धर्म का पालन किया। यज्ञ समाप्त होने के बाद जब वह लंका लौटने लगा, तब भगवान श्रीराम ने उसे रोक लिया।
ये भी पढ़े: Love Rashifal 21 January: आज शुक्र की कृपा से रिश्तों में आएगी मिठास, जानिए आपका प्यार क्या कहता है
जब रावण ने कहा तथास्तु
इस क्षण श्रीराम ने रावण से युद्ध में विजय का आशीर्वाद मांगा। धर्म से बंधे रावण ने “तथास्तु” कहकर उन्हें आशीर्वाद दे दिया। इसके बाद लंका युद्ध में श्रीराम ने रावण का वध कर धर्म की विजय स्थापित की। कुछ शास्त्रों में यह भी उल्लेख मिलता है कि रावण जानता था कि उसका अंत श्रीराम के हाथों ही होगा, फिर भी उसने यज्ञ कराकर अपने धर्म का पालन किया।
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं, ग्रंथों और सामान्य जनश्रुतियों पर आधारित है।
