कब है मार्च महीने का दूसरा प्रदोष व्रत? जानिए सटीक तारीख, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
Lord Shiva Pradosh Vrat:मार्च महीने का दूसरा प्रदोष व्रत कब है? जानिए इस व्रत की सटीक तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि, ताकि आप सही समय पर भगवान शिव की आराधना कर मनोकामनाएं पूरी कर सकें।
- Written By: सीमा कुमारी
भगवान शिव (सौ.सोशल मीडिया)
Second Pradosh Vrat March: 4 मार्च से चैत्र महीने की शुरुआत हो गयी हैं। चैत्र महीने का सनातन धर्म में बड़ा महत्व होता हैं। इस नए महीने में कई बड़े और महत्वपूर्ण व्रत-त्योहार आते हैं। इन्हीं में से एक है प्रदोष व्रत। शिव भक्तों के लिए प्रदोष व्रत का विशेष महत्व माना जाता है।
भगवान शिव को समर्पित यह व्रत कृष्ण और शुक्ल पक्ष में त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है। इस बार मार्च महीने का दूसरा प्रदोष व्रत 16 मार्च को रखा जाने वाला है।
धर्म शास्त्रों के अनुसार, इस व्रत को करने से साधक पर भगवान शिव की कृपा बरसती है। उनकी कृपा से साधक को जीवन में सभी प्रकार के भौतिक सुखों की प्राप्ति होती है। आइए, चैत्र माह का पहले प्रदोष व्रत का शुभ मुहूर्त जानते हैं-
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कब है मार्च महीने का दूसरा प्रदोष व्रत
पंचांग के अनुसार, मार्च 2026 में दूसरा प्रदोष व्रत 16 मार्च, सोमवार को पड़ रहा है। 16 तारीख को त्रयोदशी तिथि की शुरुआत सुबह 9 बजकर 41 मिनट पर शुरू होगी। इसकी समाप्ति 17 मार्च को सुबह 9 बजकर 24 मिनट पर होगी। ऐसे में व्रत 16 मार्च को ही रखा जाएगा। सोमवार के दिन त्रयोदशी व्रत पड़ने के कारण इसे सोम प्रदोष व्रत कहा जाएगा।
प्रदोष व्रत 2026 शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 5 बजकर 10 से सुबह 5 बजकर 58 मिनट तक
- प्रातः सन्ध्या – सुबह 5 बजकर 34 से सुबह 6 बजकर 46 मिनट तक
- सोम प्रदोष व्रत पूजा का मुहूर्त- शाम 6 बजकर 37 मिनट से रात 8 बजकर 44 मिनट तक। इस समय
- महादेव की पूजा, मंत्र जाप और दीप जलाना शुभ फलदायी माना जाता है।
प्रदोष व्रत का महत्व
त्रयोदशी तिथि आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत फलदायी मानी जाती है। इस दिन प्रदोष काल में शिव की उपासना करने का विधान है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से वैवाहिक जीवन में सुख-शांति आती है और संतान सुख की प्राप्ति होती है। सनातन धर्म शास्त्रों में बताया गया है कि प्रदोष काल में शिवलिंग पर जल, दूध और बेलपत्र अर्पित करना अत्यंत ही शुभ फल देता है। कहा जाता है कि इस व्रत को करने से सेहतमंद और लंबी आयु की भी प्राप्ति होती है।
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प्रदोष व्रत पूजा विधि
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और शिव जी के सामने हाथ जोड़कर व्रत का संकल्प लें।
- घर के मंदिर को साफ करें और भगवान शिव-पार्वती की प्रतिमा स्थापित करें।
- प्रदोष काल में बेलपत्र, धतूरा, भांग, सफेद फूल और गाय का कच्चा दूध अर्पित करके महादेव की विधिवत पूजा करें।
- ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप, शिव चालीसा और प्रदोष व्रत कथा का पाठ करें।
- अंत में घी के दीपक से आरती करें और अनजाने में हुई भूल के लिए क्षमा जरूर मांगें।
- इस दिन दान-पुण्य करने का भी महत्व है। अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान जरूर करें।
