रथ सप्तमी के दिन खाने में नमक डालने की क्यों है मनाही? सूर्यदेव की विधिवत पूजा से मिलेगा अक्षय वरदान
Ratha Saptami Remedies: रथ सप्तमी पर बन रहा है एक खास संयोग, जिसमें भोजन की एक छोटी-सी भूल बड़ा असर डाल सकती है। शास्त्रों में जिस चीज़ से बचने की बात कही गई है, उसका राज जानकर आप भी चौंक जाएंगे।
- Written By: सीमा कुमारी
रथ सप्तमी (सौ.सोशल मीडिया)
Best Day For Surya Dosh Nivaran : भगवान सूर्यदेव को समर्पित रथ सप्तमी का पावन पर्व हर वर्ष माघ मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाया जाता है। कल 25 जनवरी को रथ सप्तमी का पर्व मनाया जा रहा है। हिन्दू धर्म में रथ सप्तमी का बड़ा महत्व है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन भगवान सूर्य की पूजा करने से लोगों को अक्षय फल की प्राप्ति होती है। साथ ही प्रसन्न होकर भगवान भास्कर अपने भक्तों को सुख, समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य का आशीर्वाद देते है।
रथ सप्तमी का आध्यात्मिक महत्व
रथ सप्तमी का आध्यात्मिक महत्व है। इस दिन सूर्य की ओर मुख करके सूर्य स्तुति करने से त्वचा रोग आदि दूर होते हैं और आंखों की रोशनी भी बढ़ती है। इस व्रत को श्रद्धा और विश्वास से रखने पर पिता-पुत्र में प्रेम बना रहता है।
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धर्म शास्त्रों में रथ सप्तमी के दिन नमक का त्याग अत्यंत शुभ माना गया है। कहा जाता है कि, इस दिन खाने-पीने की चीजों में नमक का प्रयोग नहीं करना चाहिए। मान्यता है कि जो व्यक्ति इस दिन नमक का त्याग करता है, उसे आरोग्य की प्राप्ति होती है और पूरे साल की सप्तमी तिथि के व्रत के बराबर पुण्य फल की प्राप्ति होती है।
आखिर इस दिन नमक खाने की क्यों है मनाही
आयुर्वेद के अनुसार, रथ सप्तमी के दिन नमक खाने की इसलिए मनाही होती है क्योंकि, साधारण नमक मुख्य रूप से राजसिक माना जाता है, क्योंकि यह स्वाद में अत्यधिक तीखा नमकीन होता है और मन-शरीर में उत्तेजना बढ़ाता है।
शास्त्रों के अनुसार, रथ सप्तमी के दिन शरीर और मन को शुद्ध करने का विधान है। नमक त्याग करने से ना केवल शरीर का विषहरण (डिटॉक्स) होता है, बल्कि मानसिक शुद्धता भी प्राप्त होती है।
शास्त्रों में बताया गया है कि, नमक का त्याग करने से सूर्य दोष, रोग और नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है।
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कैसे करें रथ सप्तमी का व्रत?
- रथ सप्तमी के दिन प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें।
- तांबे के लोटे में जल, लाल फूल, अक्षत और गुड़ डालकर सूर्य देव को अर्घ्य दें।
- फिर ॐ सूर्याय नमः मंत्र का जप करें।
- सूर्य चालीसा और आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ शुभ माना जाता है।
- दिनभर फलाहार के साथ व्रत रखें, नमक का सेवन न करें।
- सूर्यास्त के बाद सात्विक भोजन करें। कई स्थानों पर सूर्य रथ पूजा और विशेष यज्ञ भी होते हैं।
