
रथ सप्तमी (सौ.सोशल मीडिया)
Rath Saptami Arghya: कल, 25 जनवरी 2026 को रथ सप्तमी मनाई जा रही है। दक्षिण भारत में यह पर्व श्रद्धा और भक्ति के साथ बड़े उत्साह से मनाया जाता है। रथ सप्तमी यानी सूर्य जयंती माघ शुक्ल सप्तमी को सूर्य देव के जन्म और उनके रथ के उत्तरायण होने के उपलक्ष्य में मनाई जाती है। इसे फसल, स्वास्थ्य और नई शुरुआत का पर्व माना जाता है। इस दिन सूर्य मंदिरों में विशेष पूजा होती है और लोग अर्क के पत्तों के साथ स्नान करते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दौरान पवित्र नदियों में स्नान करने से रोगों से मुक्ति मिलती है और लोग सेहतमंद रहते हैं। मुख्य रूप से इस मान्यता के आधार पर इसे आरोग्य सप्तमी भी कहा जाता हैं।
दक्षिण भारत में रथ सप्तमी मनाने के प्रमुख कारण है कि इस दिन सूर्य देव अपने सात घोड़ों के रथ को दक्षिण-पूर्व से उत्तर-पूर्व की ओर मोड़ते हैं। यह शीत ऋतु के अंत और फसल कटाई के मौसम का संकेत माना जाता है।
रथ सप्तमी को आरोग्य दिवस भी कहा जाता है। इस दिन सूर्य की पूजा से अच्छी सेहत मिलती है और रोग दूर होते हैं।
दक्षिण भारत में लोग आक (अर्क) के पत्तों को सिर और कंधों पर रखकर स्नान करते हैं, जिसे शारीरिक शुद्धि और रोगमुक्ति के लिए शुभ माना जाता है।
आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम जिले स्थित अरसावल्ली सूर्य नारायण स्वामी मंदिर में यह पर्व भव्य रूप से मनाया जाता है और इसे राज्य उत्सव का दर्जा प्राप्त है।
यह पोंगल के बाद मनाया जाने वाला प्रमुख पर्व है, जो किसानों के लिए नई समृद्धि और भरपूर फसल का प्रतीक माना जाता है।
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रथ सप्तमी पर सूर्य देव की पूजा करने से आत्मिक शुद्धि होती है और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। मान्यता है कि इस दिन किए गए जप, ध्यान और दान से पापों का नाश होता है तथा ज्ञान, आत्मबल और सकारात्मकता में वृद्धि होती है। सूर्य उपासना से जीवन में उन्नति, आत्मविश्वास और आध्यात्मिक जागरूकता बढ़ती है।






