‘रथ सप्तमी’ को क्यों कहते हैं ‘आरोग्य सप्तमी’, ‘मिनी मकर संक्रांति’ नाम से भी पुकारा जाता है यह पर्व
Ratha Saptami Mantras: रथ सप्तमी को सूर्य आराधना और स्वास्थ्य से जुड़ा पर्व माना जाता है। इसे आरोग्य सप्तमी और मिनी मकर संक्रांति भी कहा जाता है, क्योंकि इस दिन सूर्य के उत्तरायण होने की मान्यता है।
- Written By: सीमा कुमारी
रथ सप्तमी (सौ.सोशल मीडिया)
Ratha Saptami 2026 Shubh Sanyoga: सुख-समृद्धि और आरोग्य का प्रतीक रथ सप्तमी का पर्व इस बार 25 जनवरी को मनाया जा रहा है। यह पर्व हर वर्ष माघ मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को दक्षिण भारत सहित अन्य स्थानों में श्रद्धा एवं भक्ति के साथ मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन व्रत रखकर सूर्यदेव को अर्घ्य और पूजा अर्चना करने से सुख-समृद्धि और आरोग्य की प्राप्ति होती है।
रथ सप्तमी को ‘मिनी मकर संक्रांति’ या ‘सूर्य जयंती’ भी कहा जाता है। यह माघ शुक्ल सप्तमी को मनाया जाता है, जब सूर्य अपने सात घोड़ों वाले रथ को उत्तर की ओर मोड़ते हैं, जो उत्तरी गोलार्ध में दिन लंबे होने और वसंत ऋतु के आगमन का संकेत है।
आखिर क्यों कहते हैं मिनी मकर संक्रांति
मकर संक्रांति से सूर्य के उत्तरायण (उत्तर की ओर यात्रा) की शुरुआत होती है, जबकि रथ सप्तमी पर सूर्य अपनी इस यात्रा को तेज करते हैं।
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रथ सप्तमी का आध्यात्मिक महत्व
रथ सप्तमी सूर्य देव को समर्पित एक अत्यंत पावन पर्व है। यह पर्व हर वर्ष माघ मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी दिन सूर्य देव अपने रथ को उत्तर दिशा की ओर मोड़ते हैं, जिसे उत्तरायण का प्रतीक माना जाता है। यह दिन शीत ऋतु के अंत और शुभ ऊर्जा के आगमन का संकेत देता है।
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रथ सप्तमी को सूर्य जयंती और आरोग्य पर्व भी कहा जाता है। इस दिन व्रत रखकर सूर्य देव को अर्घ्य देने और पूजा करने से रोगों से मुक्ति मिलती है तथा शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार होता है। मान्यता है कि सूर्य की उपासना से आत्मबल, तेज और आत्मविश्वास बढ़ता है।
इस दिन किए गए जप, दान और सत्कर्म से पापों का नाश होता है और जीवन में सुख-समृद्धि, मान-सम्मान और सफलता की प्राप्ति होती है। इसलिए रथ सप्तमी को आध्यात्मिक और धार्मिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है।
