
सूर्य जयंती (सौ.सोशल मीडिया)
Rath Saptami Vrat: रविवार, 25 जनवरी को ‘रथ सप्तमी’ मनाई जा रही है। भारतीय हिन्दू संस्कृति में सूर्य देव को प्रत्यक्ष देवता माना जाता है, जिनकी पूजा से जीवन में ऊर्जा, स्वास्थ्य और सकारात्मकता का संचार होता है। हर साल माघ महीने के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को रथ सप्तमी का पर्व मनाया जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन भगवान सूर्य का जन्म हुआ था, इसलिए इस दिन को सूर्य जयंती या माघ सप्तमी भी कहा जाता है। इस पावन अवसर पर सूर्य देव की विशेष पूजा और व्रत का विधान है।
शास्त्रों के अनुसार, रथ सप्तमी वह दिन है जब सूर्य देव ने अपने सात घोड़ों वाले रथ पर सवार होकर पूरी सृष्टि को प्रकाशित करना शुरू किया था। पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण के पुत्र सांब को दुर्वासा ऋषि के श्राप से कुष्ठ रोग हो गया था, जिससे मुक्ति के लिए उन्होंने सूर्य देव की आराधना की थी। तभी से आरोग्य और संतान सुख के लिए इस व्रत का विशेष महत्व माना जाता है।
महिलाओं, विशेषकर सुहागिनों के लिए यह व्रत किसी वरदान से कम नहीं है। मान्यता है कि:
इस दिन सूर्य देव की पूजा करने से वैवाहिक जीवन में खुशहाली आती है और पति की आयु लंबी होती है।
सूर्य की किरणें सकारात्मक ऊर्जा देती हैं। इस दिन आंगन में दूध उबालने की परंपरा है, जो घर में समृद्धि का प्रतीक मानी जाती है।
ऐसी मान्यता है कि जो महिलाएं संतान प्राप्ति की कामना रखती हैं, उन्हें सूर्य जयंती पर विशेष अनुष्ठान करना चाहिए।
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