महाशिवरात्रि के दिन रुद्राभिषेक करने का क्या है विशेष महत्व? जानिए महादेव के अक्षय कृपा से क्या मिलेगा

Lord Shiva blessings: महाशिवरात्रि के दिन रुद्राभिषेक करना अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है। इस पावन अवसर पर शिवलिंग का विधिपूर्वक अभिषेक और मंत्र जाप करने से महादेव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
Mahashivratri Rudrabhishek Significance
रुद्राभिषेक का महत्व (सौ.सोशल मीडिया)
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Mahashivratri Rudrabhishek Significance: शिवरात्रि सिर्फ एक पर्व नहीं, बल्कि शिव और शक्ति के उस 'महामिलन' का उत्सव है, जिसकी गूंज पूरे देश में सुनाई देती है। यह वह पावन रात्रि है जब भक्त अपने आराध्य की कृपा पाने के लिए शिव मंदिरों की ओर खिंचे चले आते है।

महाशिवरात्रि के दिन रुद्राभिषेक करना शुभ

धर्म ग्रथों में बताया गया है कि,महाशिवरात्रि के दिन भोलेनाथ प्रसन्न मुद्रा में होते हैं और अपने भक्तों की हर पूरी करते हैं। इसलिए शिवभक्त इस दिन सह्रदय मन से भगवान भोलेनाथ की पूजा-अर्चना के साथ रुद्राभिषेक भी करते है। ऐसे में इस पवित्र दिन में शिव के रुद्राभिषेक का महत्व और ज्यादा बढ़ जाता है। वैसे तो सामान्य पूजा से भी साधकों को शिवजी की कृपा प्राप्त होती है लेकिन यदि  इस दिन भगवान शिव का रुद्राभिषेक किया जाये तो इसका महत्व और अधिक बढ़ जाता है और साधक को विशेष फल और पुण्य की प्राप्ति होती है।

रुद्राभिषेक भगवान भोलेनाथ की आराधना का विशेष अनुष्ठान है

रुद्राभिषेक भगवान भोलेनाथ की आराधना का एक विशेष अनुष्ठान है। शिवजी का रुद्राभिषेक करने के लिए सबसे पहले शुभ दिन तय करना जरूरी होता है। ऐसे में यदि महाशिवरात्रि के दिन शिवजी का रुद्राभिषेक किया जाए तो कहने ही क्या। इस दिन इस पूजा को करना बहुत शुभ माना जाता है। रुद्राभिषेक अनुष्ठान के दौरान 108 पवित्र द्रव्यों से शिवलिंग का अभिषेक किया जाता है।

क्या घर पर कर सकते हैं रुद्राभिषेक?

वैसे तो रुद्राभिषेक मंदिर में पूरे विधि-विधान के साथ कराया जाता है। लेकिन अगर कोई घर पर रुद्राभिषेक कराना चाहे तो उसके लिए भी विधि है।

घर पर रुद्राभिषेक कैसे करें?

  • प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें।
  • पूजा स्थान को साफ करके शिवलिंग स्थापित करें (धातु, पत्थर या पारद का छोटा शिवलिंग भी रख सकते हैं)।
  • सबसे पहले शुद्ध जल या गंगाजल से अभिषेक करें।
  • इसके बाद दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से पंचामृत चढ़ाएं।
  • बेलपत्र, सफेद चंदन और धतूरा अर्पित करें।
  • “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें।
  • अंत में आरती करें और प्रसाद बांटें।

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किन बातों का रखें ध्यान?

  • शिवलिंग की दिशा उत्तर या पूर्व की ओर हो।
  • पूजा शांत मन और एकाग्रता से करें।
  • तुलसी दल शिवलिंग पर न चढ़ाएं।

यदि संभव हो तो विशेष अवसर महाशिवरात्रि जैसे i पर रुद्राभिषेक करना और भी शुभ माना जाता है। श्रद्धा सबसे महत्वपूर्ण है  विधि सरल हो सकती है, लेकिन भाव सच्चा होना चाहिए।

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