

Mahashivratri Rudrabhishek Significance: शिवरात्रि सिर्फ एक पर्व नहीं, बल्कि शिव और शक्ति के उस 'महामिलन' का उत्सव है, जिसकी गूंज पूरे देश में सुनाई देती है। यह वह पावन रात्रि है जब भक्त अपने आराध्य की कृपा पाने के लिए शिव मंदिरों की ओर खिंचे चले आते है।
धर्म ग्रथों में बताया गया है कि,महाशिवरात्रि के दिन भोलेनाथ प्रसन्न मुद्रा में होते हैं और अपने भक्तों की हर पूरी करते हैं। इसलिए शिवभक्त इस दिन सह्रदय मन से भगवान भोलेनाथ की पूजा-अर्चना के साथ रुद्राभिषेक भी करते है। ऐसे में इस पवित्र दिन में शिव के रुद्राभिषेक का महत्व और ज्यादा बढ़ जाता है। वैसे तो सामान्य पूजा से भी साधकों को शिवजी की कृपा प्राप्त होती है लेकिन यदि इस दिन भगवान शिव का रुद्राभिषेक किया जाये तो इसका महत्व और अधिक बढ़ जाता है और साधक को विशेष फल और पुण्य की प्राप्ति होती है।
रुद्राभिषेक भगवान भोलेनाथ की आराधना का एक विशेष अनुष्ठान है। शिवजी का रुद्राभिषेक करने के लिए सबसे पहले शुभ दिन तय करना जरूरी होता है। ऐसे में यदि महाशिवरात्रि के दिन शिवजी का रुद्राभिषेक किया जाए तो कहने ही क्या। इस दिन इस पूजा को करना बहुत शुभ माना जाता है। रुद्राभिषेक अनुष्ठान के दौरान 108 पवित्र द्रव्यों से शिवलिंग का अभिषेक किया जाता है।
वैसे तो रुद्राभिषेक मंदिर में पूरे विधि-विधान के साथ कराया जाता है। लेकिन अगर कोई घर पर रुद्राभिषेक कराना चाहे तो उसके लिए भी विधि है।
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यदि संभव हो तो विशेष अवसर महाशिवरात्रि जैसे i पर रुद्राभिषेक करना और भी शुभ माना जाता है। श्रद्धा सबसे महत्वपूर्ण है विधि सरल हो सकती है, लेकिन भाव सच्चा होना चाहिए।