रामचरितमानस ने कैसे बदल दी भक्ति की भाषा? जानें कब है तुलसीदास जयंती और क्यों खास है यह दिन

Tulsidas Jayanti 2026:रामचरितमानस ने भक्ति को जन-जन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जानिए तुलसीदास जयंती 2026 में कब मनाई जाएगी, इसका धार्मिक महत्व क्या है।
Tulsidas Jayanti Kab  Hai
गोस्वामी तुलसीदास(सौ.जैमिनी)
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Tulsidas Jayanti Kab Hai 2026: तुलसीदास जयंती हर वर्ष श्रावण मास की सप्तमी तिथि को मनाई जाती है। इस साल 2026 में तुलसीदास जयंती 19 अगस्त को मनाई जाएगी। गोस्वामी तुलसीदास न केवल एक महान संत थे, बल्कि उन्होंने हिंदी साहित्य को एक अनुपम काव्य "रामचरितमानस" की अमूल्य सौगात दी, जिसे आज हर रामभक्त श्रद्धा से पढ़ता है। उनका जीवन, संघर्ष, भक्ति और लेखनी आज भी लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

कब है 2026 तुलसीदास जयंती?

द्रिक पंचांग के अनुसार, सप्तमी तिथि की शुरुआत 18 अगस्त 2026 को शाम 5 बजकर 50 मिनट से होगी। वहीं, इसका समापन 19 अगस्त 2026 को शाम 7 बजकर 19 मिनट पर होगा। इसलिए उदया तिथि के अनुसार, साल 2026 में तुलसीदास जयंती 19 अगस्त को मनाई जाएगी।

Tulsidas Jayanti Kab  Hai
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गोस्वामी तुलसीदास कौन थे?

गोस्वामी तुलसीदास भारतीय इतिहास के महान संत, दार्शनिक, कवि और रामभक्त थे। उन्हें हिन्दी साहित्य के महानतम कवियों में स्थान प्राप्त है। उन्होंने अपने संपूर्ण जीवन को भगवान श्रीराम की भक्ति, सनातन धर्म के प्रचार और समाज में नैतिक मूल्यों की स्थापना के लिए समर्पित कर दिया।

तुलसीदास जी ने ऐसे समय में धर्म और भक्ति का संदेश दिया, जब समाज अनेक सामाजिक और धार्मिक चुनौतियों का सामना कर रहा था। उन्होंने अपनी रचनाओं के माध्यम से लोगों को सत्य, करुणा, सेवा, धर्म, मर्यादा और भक्ति का मार्ग दिखाया। उनकी सबसे प्रसिद्ध कृति रामचरितमानस आज भी भारत ही नहीं, बल्कि विश्वभर में करोड़ों लोगों द्वारा श्रद्धा के साथ पढ़ी जाती है।

उनकी लेखनी की विशेषता यह थी कि उन्होंने आध्यात्मिक ज्ञान को अत्यंत सरल और सहज भाषा में प्रस्तुत किया, जिससे सामान्य व्यक्ति भी भगवान श्रीराम के जीवन, आदर्शों और शिक्षाओं को आसानी से समझ सके।

क्यों खास होती है तुलसीदास जयंती?

तुलसीदास जयंती केवल एक संत की जयंती मनाने का अवसर नहीं है, बल्कि यह उनके विचारों और भक्ति संदेश को याद करने का दिन भी है। तुलसीदास जी की रचनाओं में भक्ति के साथ-साथ सत्य, धर्म, मर्यादा, करुणा और अच्छे आचरण का संदेश मिलता है।

इस दिन भक्त तुलसीदास जी की रचनाओं का पाठ करते हैं और भगवान श्रीराम की पूजा-अर्चना करते हैं। कई जगहों पर रामचरितमानस का पाठ, भजन और धार्मिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं ।

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