Rambha Teej: कल रखा जाएगा रंभा तृतीय का व्रत, जानिए कैसे करें पूजन और क्या है इसका पौराणिक महत्व
Rambha Teej Vrat Katha: रंभा तृतीया का व्रत हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा और व्रत करने से सुख, सौभाग्य और वैवाहिक जीवन में खुशहाली आती है।
- Written By: सीमा कुमारी
रंभा तीज ( सौ. जैमिनी)
Rambha Tritiya Worship Method: 17 जून को रंभा तीज मनाई जा रही है। हिन्दू धर्म में हरियाली तीज, कजरी तीज और हरतालिका तीज की तरह ही रंभा तीज सुहागिन महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखता है। रंभा तीज का पावन पर्व हर साल ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि के दिन मनाया जाता है।
रंभा तीज का महत्व
धर्म ग्रथों में रंभा तीज का महत्व बड़ा महत्व बताया गया है। यह दिन सुहागिन महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखता है इस दिन सुहागिन महिलाएं व्रत रखती हैं और भगवान शिव व माता पार्वती का विशेष पूजन करती है।
मान्यता है कि रंभा तीज का व्रत रखने और शिव व माता पावर्ती का पूजन करने से सुहागिन महिलाओं को सुखी वैवाहिक जीवन का आशीर्वाद प्राप्त होता है। साथ ही पति की आयु बढ़ती है और सौभाग्य का वरदान प्राप्त होता है।
सम्बंधित ख़बरें
Mantra Jap: तनाव, बेचैनी और अनिद्रा से राहत का आसान तरीका? सोने से पहले करें 1 मिनट का मंत्र जप
भीमाशंकर ज्योतिलिंग दर्शन के बदले नियम, अब नहीं होंगी VIP एंट्री, केवल इनको मिलेगा प्रवेश
Maa Dhumavati : मां धूमावती का रहस्यमयी स्वरूप, क्यों नहीं करतीं सुहागिन महिलाएं उनकी पूजा
Bada Mangal Upay: बड़े मंगल का अचूक उपाय, शादी की रुकावटें होंगी दूर
रंभा तीज 2026 का शुभ मुहूर्त
ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि का आरंभ 16 जून, मंगलवार के दिन रात में 12 बजकर 53 मिनट पर होगा। अगले दिन यानी 17 जून, बुधवार को रात में 9 बजकर 49 मिनट तक तृतीय तिथि समाप्त होगी। ऐसे में उदया तिथि के अनुसार, 17 जून को ही रंभा तीज का व्रत किया जाएगा।
यह भी पढ़ें- Mantra Jap: तनाव, बेचैनी और अनिद्रा से राहत का आसान तरीका? सोने से पहले करें 1 मिनट का मंत्र जप
रंभा तीज व्रत-पूजा विधि
- सबसे पहले सुबह ब्रह्रा मुहूर्त में उठें और स्नान करें।
- फिर घर के मंदिर में भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा को स्थापित करें, फिर व्रत और पूजा का संकल्प का लेते हुए गणपति का पूजन करें।
- गणपति पूजन के बाद भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा पर जल, दूध, पंचामृत, चंदन, फूल, माला, दूर्वा और बिल्प पत्र अर्पित करें।
- इसके बाद माता पार्वती को सुहाग की सामग्री अर्पित करें जैसे- चुनरी, सिंदूर, बिंदी, चूड़ियां और दूसरी श्रृंगार की चीजों को अर्पित करें।
- फिर धूप-और दीपक जलाकर ऊं नम: शिवाय और ऊं गौर्ये नम: मंत्र का जाप करें।
- इसके बाद रंभा तीज व्रत का पाठ करें और अंत में आरती करें। फिर परिवार संग मिलाकर भगवान से सुख-समृद्धि की कामना करें।
