

Rakhi Mein Teen Gaanth Kyon : 28 अगस्त 2026 को रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जाएगा। हर साल सावन पूर्णिमा के दिन मनाया जाने वाला रक्षाबंधन का त्योहार सिर्फ भाई की कलाई पर राखी बांधने का त्योहार नहीं है, बल्कि यह भाई-बहन के प्यार, भरोसे और एक-दूसरे की खुशियों की कामना से जुड़ा एक खास दिन भी है।
हिन्दू लोक एवं ज्योतिष मान्यता के अनुसार, इस दिन बहन भाई की कलाई पर राखी बांधकर भाई की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य व तरक्की के लिए कामना करती है। सनातन धर्म में राखी बांधने से जुड़ी कई छोटी-छोटी परंपराएं भी निभाई जाती हैं, जिनका अलग-अलग परिवारों में अपने तरीके से पालन किया जाता है। इन्हीं में से एक है राखी के धागे में गांठ लगाने की परंपरा है।
कई पारंपरिक मान्यताओं में राखी पर तीन गांठें लगाने को शुभ माना जाता है। इन्हें भाई-बहन के रिश्ते से जुड़ी अलग-अलग शुभ भावनाओं का प्रतीक माना जाता है। पहली गांठ रिश्ते की मजबूती, दूसरी सुख-समृद्धि और तीसरी भाई की खुशहाली तथा सुरक्षा की कामना से जोड़ी जाती है।
लोक मान्यता के अनुसार, पहली गांठ का अर्थ भाई-बहन के रिश्ते की मजबूती से जोड़कर देखा जाता है। बचपन की लड़ाइयां, छोटी-छोटी नोकझोंक और ढेर सारा प्यार, भाई-बहन का रिश्ता ऐसा ही होता है। राखी की पहली गांठ इसी रिश्ते को हमेशा मजबूत बनाए रखने की प्यारी-सी कामना बन सकती है।
राखी की दूसरी गांठ को सुख और समृद्धि की कामना से जोड़ा देखा जाता है। बहन अपने भाई के जीवन में तरक्की, शांति और खुशियां आने की प्रार्थना करती है। यहां खास बात यह है कि आज राखी का रिश्ता केवल भाई की सुरक्षा तक सीमित नहीं है। भाई भी अपनी बहन के सुख, सम्मान और सफलता की कामना करता है।
बताया जाता है कि तीसरी गांठ को अक्सर रिश्ते में विश्वास, लंबी उम्र और खुशहाली की भावना से जोड़ा देखाजाता है। यानी राखी का धागा सिर्फ कलाई पर नहीं बंधता, बल्कि दो लोगों के बीच मौजूद अपनापन भी याद दिलाता है। और शायद यही वजह है कि राखी की गांठ छोटी होकर भी इतनी बड़ी भावना समेट लेती है।
क्या तीन गांठ बांधने की कोई धार्मिक वजह है नहीं। अगर आपके घर में राखी बांधने की कोई अलग परंपरा है, तो उसे ही अपनाना बेहतर है। राखी में कितनी गांठ लगाई जाए, इससे ज्यादा मायने रखता है कि इसे प्यार, सम्मान और शुभकामना के साथ बांधा जाए।