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100 गलतियों के बाद मिला दंड, शिशुपाल की कहानी से सीखिए कब खत्म होती है माफी की सीमा

Shishupal Story: भारतीय पुराणों में कई ऐसे प्रसंग हैं, जो आज भी जीवन का बड़ा संदेश देते हैं। ऐसी ही एक कथा है चेदि के राजकुमार Shishupal की, जिनका अंत स्वयं Krishna के हाथों हुआ।

  • Written By: सिमरन सिंह
Updated On: Feb 26, 2026 | 06:11 PM

Shishupal killed by Krishna (Source. Pinterest)

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Shishupal Killed By Krishna: भारतीय पुराणों में कई ऐसे प्रसंग हैं, जो आज भी जीवन का बड़ा संदेश देते हैं। ऐसी ही एक कथा है चेदि के राजकुमार Shishupal की, जिनका अंत स्वयं Krishna के हाथों हुआ। यह कहानी केवल द्वेष और अहंकार की नहीं, बल्कि क्षमा की सीमा की भी है।

जन्म से जुड़ी अद्भुत भविष्यवाणी

शिशुपाल, चेदि नरेश धमघोष के पुत्र थे। पौराणिक मान्यता के अनुसार वे भगवान विष्णु के पार्षद ‘जया’ का अवतार थे, जिन्हें श्राप मिला था कि वे तीन बार धरती पर जन्म लेकर भगवान विष्णु के हाथों मारे जाएंगे। उनका जन्म असामान्य था तीन आंखें और चार भुजाएं। उनकी माता भयभीत हो उठीं। तभी आकाशवाणी हुई कि जब यह बालक अपने वध करने वाले की गोद में बैठेगा, तब उसकी अतिरिक्त आंख और भुजाएं लुप्त हो जाएंगी। जब कृष्ण चेदि पहुंचे और शिशुपाल को गोद में लिया, तो भविष्यवाणी सच हो गई। यह देखकर शिशुपाल की माता ने कृष्ण से वचन लिया कि वे उसके सौ अपराधों तक क्षमा करेंगे।

रुक्मिणी प्रसंग से बढ़ी शत्रुता

समय बीता और विदर्भ की राजकुमारी रुक्मणी का विवाह शिशुपाल से तय हुआ। लेकिन रुक्मिणी मन ही मन कृष्ण से प्रेम करती थीं। उन्होंने पत्र लिखकर कृष्ण से सहायता मांगी। कृष्ण ने रुक्मिणी का हरण कर उनसे विवाह कर लिया। यह घटना शिशुपाल के अहंकार पर गहरा आघात थी। इसके बाद उसने कृष्ण का अपमान करने और उन्हें नीचा दिखाने का कोई अवसर नहीं छोड़ा।

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राजसूय यज्ञ में चरम अपमान

पांडवों के Rajasuya Yagya में कृष्ण को विशेष अतिथि के रूप में सम्मानित किया गया। यह देखकर शिशुपाल ईर्ष्या से भर उठा। उसने सभा में कृष्ण, भीष्म और कुंती तक का अपमान किया। कृष्ण शांत रहे। वे मुस्कुराते हुए उसकी गिनती करते रहे। जब शिशुपाल ने 99 अपराध पूरे किए, तो कृष्ण ने चेतावनी दी। लेकिन वह नहीं रुका। जैसे ही उसने सौवीं गलती की, कृष्ण ने अपने सुदर्शन चक्र से उसका वध कर दिया।

ये भी पढ़े: मृत्यु से डरें नहीं, समझें उसका रहस्य, क्या सच में इंसान मौत को जीत सकता है? जानिए संतों की अद्भुत सीख

क्या देती है यह कथा सीख?

यह प्रसंग सिखाता है कि क्षमा महान गुण है, लेकिन उसकी भी सीमा होती है। यदि अपराधी को समय पर दंड न मिले, तो उसका साहस बढ़ता है और समाज को अधिक हानि पहुंचती है। शिशुपाल की कथा हमें याद दिलाती है कि अन्याय और अहंकार का अंत निश्चित है चाहे वह कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो।

Punishment after 100 mistakes learn from shishupals story when the limit of forgiveness ends

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Published On: Feb 26, 2026 | 04:30 PM

Topics:  

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