Puja Time: दोपहर 12 से 4 बजे के बीच क्यों नहीं करनी चाहिए पूजा? जानें क्या है इसके पीछे की धार्मिक मान्यता
Puja Time Hindu: हिन्दू धर्म में पूजा-पाठ का विशेष महत्व माना गया है। दोपहर 12 से 4 बजे के बीच पूजा न करने की मान्यता के पीछे धार्मिक कारण बताए जाते हैं। जानिए इस परंपरा का आधार और पूजा का शुभ समय।
- Written By: सीमा कुमारी
पूजा-पाठ (सौ.AI)
Puja Time In Hinduism: हिन्दू धर्म में पूजा-पाठ का विशेष महत्व माना गया है। अधिकतर हिंदू परिवारों में दिन की शुरुआत भगवान की पूजा और आराधना से होती है। विशेष रूप से ब्रह्म मुहूर्त में पूजा-पाठ करना अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है।लेकिन आजकल की व्यस्त लाइफस्टाइल के कारण कई लोग सुबह जल्दी पूजा-अर्चना नहीं कर पाते इसलिए कुछ लोग दोपहर में स्नान करके पूजा करते है।
कई बार घर में चल रहे बड़े धार्मिक अनुष्ठान भी दोपहर तक जारी रहते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि दोपहर के समय पूजा की शुरुआत करना सही माना जाता है या नहीं? आइए आसान भाषा में समझते हैं कि शास्त्रों में इसके क्या नियम बताए गए हैं।
क्यों दोपहर में पूजा शुरू करना मना हैं?
हिंदू शास्त्रों के मुताबिक, दोपहर में पूजा शुरू करना मना हैं। धार्मिक एवं लोक मान्यताओं के अनुसार, दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक का समय देवी-देवताओं के विश्राम का समय होता हैं। इस दौरान आपने देखा होगा है कि मंदिरों के कपाट भी बंद कर दिए जाते हैं ताकि देवी-देवताओं के विश्राम में खलल न पड़े इसलिए इस समय घर में कोई नई पूजा या आराधना करने के लिए मना किया जाता हैं।
सम्बंधित ख़बरें
Sawan Somwar: सावन के दूसरे सोमवार को बन रहा ‘दुर्लभ शिव संयोग’, इस दिन पूजा से क्यों मिल सकता है कई गुना फल
जन्माष्टमी की तारीख में बड़ा कन्फ्यूजन 4 या 5 सितंबर, जानें कब है निशीथ काल का दिव्य मुहूर्त
Abdul Kalam Inspired Baby Names: डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के जीवन और विचारों से प्रेरित 7 मीनिंगफुल बच्चों के नाम
Numerology: इन जन्म तारीखों में जन्मी महिलाएं मानी जाती हैं ‘घर की लक्ष्मी’, परिवार में लाती हैं सुख-समृद्धि
कुछ विशेष परिस्थितियों में दोपहर की पूजा दोषपूर्ण नहीं मानी जाती
लंबे अनुष्ठान: अगर कोई पूजा-पाठ सुबह से ही शुरू हो चुका है और वह दोपहर या शाम तक जारी रहता है, तो उसमें कोई दोष नहीं होता।
शुभ मुहूर्त: नवरात्र में कलश स्थापना के लिए अगर सुबह का मुहूर्त छूट जाए, तो दोपहर के ‘अभिजीत मुहूर्त’ में स्थापना की जा सकती है।
विशेष उपाय: कालसर्प दोष निवारण जैसी कुछ पूजा राहुकाल में की जाती हैं। अगर उस दिन राहुकाल दोपहर में पड़े, तो दोपहर को अनुष्ठान किया जा सकता है।
दोपहर में इस तरह करें भगवान का ध्यान
अगर आपको दोपहर के समय भगवान को याद करना है, तो आप मूर्ति को बिना छुए मानसिक पूजा कर सकते हैं। अपने इष्टदेव का नाम स्मरण करना और विश्राम कर रहे देवी-देवताओं को दूर से ही प्रणाम कर लेना शुभ रहता है।
